वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने सार्वजनिक खरीद के तरीके को बदल दिया है। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक पहले 422 करोड़ रुपये के सकल व्यापारिक मूल्य (GMV) से शुरू हुआ GeM आज 1.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्तर पर पहुंच गया है।
गोयल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि GeM पर 12.28 लाख से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (MSEs) पंजीकृत हैं। इनमें 2.25 लाख से अधिक महिला उद्यमियों द्वारा संचालित हैं। इसके अलावा 42,000 से अधिक स्टार्टअप भी पोर्टल पर पंजीकृत हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में GeM ने प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, बेहतर मूल्य खोज सुनिश्चित करने, खरीद प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने, सरकार के लिए महत्वपूर्ण बचत करने और पूरी खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर जवाबदेही मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गोयल के अनुसार, GeM ने सरकारी बाजारों को MSEs, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और बुनकरों के लिए अधिक सुलभ बनाया है। उन्होंने कहा कि यह मंच ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को भी बढ़ावा दे रहा है।
मंत्री ने कहा कि GeM आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख माध्यम बनकर उभर रहा है और विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रहा है।
9 अगस्त 2016 को शुरू हुआ GeM अब अपने 11वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। पोर्टल पर 1.37 लाख से अधिक सरकारी खरीदार संगठन और करीब 25 लाख विक्रेता एवं सेवा प्रदाता जुड़े हुए हैं।
आधिकारिक तथ्यपत्र के अनुसार, GeM पर सरकारी खरीद की जरूरतों को पूरा करने के लिए 10,660 से अधिक उत्पाद श्रेणियां और 350 सेवा श्रेणियां उपलब्ध हैं।
सरकार अब GeM के माध्यम से सार्वजनिक खरीद व्यवस्था को और अधिक स्मार्ट तथा एकीकृत बनाने पर जोर दे रही है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अधिक व्यापक भागीदारी के जरिए पारदर्शिता, दक्षता और बेहतर शासन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
GeM के माध्यम से सरकारी मांग को स्थानीय उद्यमों से जोड़ने से ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’ और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।