15वीं हरियाणा विधान सभा का दूसरा मानसून सत्र सार्थक, सकारात्मक, नसीहत और जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा के साथ संपन्न हो गया। 27 अगस्त से आरंभ होकर 1 सितंबर तक चले इस सत्र में कुल तीन बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 17 घंटे 39 मिनट तक सदन की कार्यवाही चली। सत्र के दौरान सदन का सदुपयोग हुआ, जिस कारण अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हो सकी। कई अवसरों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण सदन का माहौल गर्माया भी, लेकिन विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने अपने कुशल, संतुलित और प्रभावी संचालन से सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने में भूमिका निभाई। वे विशेषाधिकार के बाद भी सदन को सुचारू रूप से चलाने में सफल रहे। उन्होंने सदस्यों से अनुशासन और सदन की मर्यादा बनाए रखने तथा चर्चा को जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रखने का आह्वान किया। अनेक अवसरों पर वे नसीहत देते भी नजर आए। अध्यक्ष के कुशल संचालन से सदन की गरिमा और संसदीय परंपराओं को बनाए रखने की उत्कृष्ट मिसाल देखने को मिली। लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि जनहित, सदन की गरिमा तथा जन-विश्वास हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। सत्र के दौरान 66 सदस्यों की उपस्थिति शत-प्रतिशत रही। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री, विधान सभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सभी मंत्री भी शामिल रहे। मानसून सत्र के दौरान एक दिन शून्यकाल का आयोजन हुआ। शून्यकाल के दौरान 1 घंटा 57 मिनट तक कार्यवाही चली, जिसमें कुल 38 विधायकों ने विभिन्न लोकहित के मुद्दों को सदन के समक्ष रखा। शून्यकाल में भारतीय जनता पार्टी के 13 तथा कांग्रेस के 22 विधायकों ने चर्चा में भाग लिया। इनके अतिरिक्त तीन निर्दलीय विधायकों ने भी इस दौरान अपनी बात रखी।
मानसून सत्र के दौरान 3 दिन प्रश्नकाल हुए। इसके लिए 60 तारांकित प्रश्न शामिल किए गए थे, इनमें से 31 के जवाब सदन में दिए गए। विधान सभा सचिवालय को 51 सदस्यों से 266 तारांकित प्रश्नों के लिए नोटिस प्राप्त हुए थे, इनमें से 167 एडमिट हुए। सत्र के पहले दिन परिस्थितियां ऐसी बनी कि प्रश्नकाल के दौरान एक भी प्रश्न का मौखिक जवाब नहीं दिया जा सका।
इसी प्रकार 22 विधायकों की ओर से 126 अतारांकित प्रश्नों के नोटिस प्राप्त हुए। इनमें से 97 अतारांकित प्रश्न स्वीकृत हुए, जिनमें से सूचीबद्ध सभी 93 प्रश्नों के जवाब विधायकों को भेजे गए।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के लिए 25 नोटिस प्राप्त हुए थे, इनमें से 6 स्वीकृत हुए। सत्र की सभी तीन बैठकों में 2-2 ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर चर्चा हुईं।
कार्य स्थगन प्रस्ताव के लिए 4 नोटिस प्राप्त हुए। इन सभी को शर्तें पूरी न करने के कारण अस्वीकृत कर दिया गया। सत्र के लिए 15 विधेयकों के प्रारूप मिले थे, जो चर्चा उपरांत पारित कर दिए गए। अल्प अवधि चर्चा के लिए एक सूचना प्राप्त हुई थी, लेकिन इसे विपक्षी सदस्य ने वापस ले लिया।
सत्र के दौरान 2 सरकारी संकल्प भी पारित किए गए। इनमें जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण संशोधन अधिनियम 2024 (2024 का केंद्रीय अधिनियम संख्या-5) को 31 अगस्त को पारित किया गया। वहीं, एक सितंबर को श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व के अवसर पर दूसरा सरकारी संकल्प पारित किया गया।
इस सत्र में एक प्रस्ताव नियम 84 के अधीन तथा एक गैर सरकारी प्रस्ताव का भी नोटिस प्राप्त हुआ, जो शर्तें पूरी नहीं करने के कारण अस्वीकार हो गया।
इस बीच अध्यक्ष ने ऑब्जर्वेशन भी दी, जिसमें सदस्यों से अनुशासन का पालन और सदन की मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया गया। इस सत्र के दौरान अलग-अलग दीर्घाओं में 753 दर्शकों ने सदन की कार्यवाही देखी। इन दर्शकों में 11 शिक्षण संस्थाओं के 446 विद्यार्थी व शिक्षक शामिल रहे।