यमुनानगर : हरियाणा में आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों को अपने क्लेम के भुगतान में लंबी देरी के कारण भारी आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा के लगभग 480 अस्पतालों का हरियाणा सरकार की तरफ 1200 करोड़ से अधिक का बकाया है। इसी के चलते इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा ने 16 सितंबर से सेवाएं हरियाणा में बंद करने की चेतावनी दी है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा की प्रधान डॉ सुनीला सोनी का कहना है कि हाल ही में, ऐसी आर्थिक मुश्किलों के कारण एक अस्पताल को बंद भी करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि क्लेम क्लियर करने के लिए तय 15 दिनों की समय-सीमा के बावजूद, भुगतान में देरी ,अब छह महीने से ज़्यादा हो गई है।
इससे कई अस्पताल भारी आर्थिक दबाव में आ गए हैं, जिससे आयुष्मान सेवाएं जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस बारे हरियाणा आयुष्मान के सीईओ को लिखे पत्र में कहा है कि भुगतान में लगातार देरी से हरियाणा के गरीब लाभार्थियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर बुरा असर पड़ रहा है ।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद, यह समस्या हल नहीं हुई है। इसलिए, हमें आपको यह सूचित करना पड़ रहा है कि आयुष्मान से जुड़े अस्पताल 1 सितंबर को रात 12:00 बजे (आधी रात) से अगली रात 12:00 बजे तक आयुष्मान सेवाएं बंद रखेंगे।
डॉ सुनीला सोनी ने बताया कि इस सांकेतिक निलंबन का उद्देश्य सरकार, संबंधित अधिकारियों, मीडिया और आम जनता का ध्यान उन गंभीर आर्थिक मुश्किलों की ओर खींचना है जिनका सामना आयुष्मान से जुड़े अस्पताल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं होता है, तो हमें पूरे हरियाणा में 16 सितंबर को रात 12:00 बजे से आयुष्मान सेवाएं पूरी तरह से बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि हम मरीजो को किसी भी तरह की दिक्कत पैदा नहीं करना चाहते। लेकिन यह सारा मामला सरकार पर निर्भर है। सरकार हमारी आर्थिक स्थिति के मध्य नजर कोई कदम नहीं उठा रही। हमने करोड़ों रुपया सरकार से लेना है, जो नहीं दिया जा रहा।
इसी के चलते आयुष्मान सेवाएं हरियाणा में 16 दिसंबर से बंद की जा सकती हैं। हरियाणा में रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 1 करोड़ 69 लाख आयुष्मान और चिरायु कार्ड धारक (लाभार्थी) हैं। हरियाणा सरकार आयुष्मान भारत योजना के साथ-साथ 'चिरायु हरियाणा योजना' भी चलाती है, जिसके तहत कम आय वाले परिवारों को 5 लाख रुपये तक का सालाना मुफ्त स्वास्थ्य इलाज मिलता है।