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सेहत

सब कुछ साफ दिखने के बावजूद क्यों करानी चाहिए नियमित आंखों की जांच?

18 जुलाई, 2026 07:01 PM

अधिकांश लोग तब तक आंखों के डॉक्टर के पास नहीं जाते, जब तक उन्हें धुंधला दिखाई देना या कोई बड़ी परेशानी महसूस न हो। लेकिन नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोच खतरनाक साबित हो सकती है। आंखों की कई गंभीर बीमारियां शुरुआती दौर में बिना दर्द और बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती हैं। ऐसे में नियमित नेत्र जांच आंखों की रोशनी बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या शर्मा के अनुसार, ओपीडी में अक्सर लोग पूछते हैं, “मुझे तो सब ठीक दिखाई देता है, फिर आंखों की जांच कराने की क्या जरूरत है?” जबकि हकीकत यह है कि जब तक नजर कमजोर होने का एहसास होता है, तब तक कई बार बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

नेत्र विशेषज्ञों के मुताबिक, आंखों की नियमित जांच सिर्फ चश्मे का नंबर बदलने के लिए नहीं होती। इसके जरिए ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद), मोतियाबिंद, डायबिटिक रेटिनोपैथी, रेटिना की बीमारियों और मधुमेह व उच्च रक्तचाप का आंखों पर पड़ने वाला असर भी शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। समय रहते बीमारी का पता चलने पर इलाज आसान हो जाता है और आंखों की रोशनी लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है।

आज के डिजिटल दौर में ड्राई आई (Dry Eye) की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर स्क्रीन का इस्तेमाल, एयर कंडीशनर वाले माहौल में लगातार काम करना और कम पलकें झपकाना इसके प्रमुख कारण हैं।

ड्राई आई के शुरुआती लक्षणों में आंखों में जलन, चुभन, सूखापन, लालपन, बार-बार पानी आना और कभी-कभी धुंधला दिखाई देना शामिल हैं। कई लोग इन्हें सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, यदि समय पर इलाज न कराया जाए, तो गंभीर मामलों में यह कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकती है, संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती है और देखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्क्रीन का उपयोग करते समय 20-20-20 नियम अपनाएं। यानी हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इसके अलावा पर्याप्त पानी पिएं, नियमित रूप से पलकें झपकाएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें।

डॉ. सौम्या शर्मा के अनुसार, यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है, या आपको मधुमेह, उच्च रक्तचाप है अथवा परिवार में आंखों की बीमारी का इतिहास रहा है, तो नियमित नेत्र जांच को अपनी स्वास्थ्य दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाएं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार आंखें पूरी तरह सामान्य लगती हैं, लेकिन एक साधारण जांच भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं को समय रहते पकड़ सकती है। इसलिए हर व्यक्ति को हर 6 से 12 महीने में एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए।

 

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