शिमला : हिमाचल प्रदेश के राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की विरासत, विपक्ष की बयानबाजी और सेब बागवानों के मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी है। शिमला स्थित प्रदेश सचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान नेगी ने जहां एक ओर भाजपा और मंडी की सांसद कंगना रनौत पर तीखा प्रहार किया, वहीं बागवानों को जारी किए गए करोड़ों रुपए के भुगतान के आंकड़े भी साझा किए।
लोगों के दिलों पर राज करने वाले राजा थे वीरभद्र सिंह
स्वर्गीय वीरभद्र सिंह से जुड़े एक सवाल के जवाब में मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री का अपना एक अलग रुतबा था। उन्होंने कहा कि वह लोगों के दिलों पर राज करने वाले राजा थे। किसी स्थान पर उनके पोस्टर न लगने से उनका राजनीतिक और सामाजिक कद कम नहीं हो सकता। नेगी ने पूर्व मुख्यमंत्री की तुलना प्रदेश के निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार से करते हुए कहा कि दोनों ही नेता आज भी हिमाचल की जनता के दिलों में बसे हुए हैं।
सांसद कंगना रनौत और केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला
जगत सिंह नेगी ने बिना नाम लिए सांसद कंगना रनौत के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि जो निर्वाचित प्रतिनिधि हिमाचल प्रदेश को देश पर बोझ बताते हैं, वे खुद इस धरती पर बोझ हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश की जनता भी अब ऐसे प्रतिनिधियों को चुनकर पछता रही होगी। मंडी में आई प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए नेगी ने कहा कि जब जनता को जरूरत थी, तब सांसद ने रास्ते खराब होने का हवाला देकर लोगों से मिलने तक की जहमत नहीं उठाई। नेगी ने आरोप लगाया कि सांसद संभवत: ऊपर से निर्देश मिलने और नेता प्रतिपक्ष की सलाह पर ही आधारहीन बयानबाजी करती हैं।
केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए नेगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए हिमाचल को 1,500 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी, लेकिन उसमें से 15 पैसे भी राज्य को नहीं मिले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद से देश को जाति, धर्म और क्षेत्रवाद के नाम पर बांटने का प्रयास किया जा रहा है।
सेब बागवानों को 262 करोड़ का भुगतान, पुरानी देनदारी भी चुकाई
बागवानी मंत्री ने भाजपा पर किसानों-बागवानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए विभागीय आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना के तहत अब तक बागवानों को 262 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान कर दिया है। इसमें पूर्व भाजपा सरकार के समय की 114 करोड़ रुपए की लंबित देनदारी भी शामिल है, जिसे वर्तमान सरकार ने चुकाया है।
इस साल सेब की पैदावार घटी, डीबीटी से हो रहा भुगतान
नेगी ने जानकारी दी कि मौसम की बेरुखी, फ्लावरिंग के दौरान ठंड और चिलिंग आवर्स पूरे न होने के कारण इस वर्ष सेब की फसल कम हुई है। अब तक लगभग 1 करोड़ 23 लाख 34 हजार 739 सेब की पेटियां मंडियों में पहुंची हैं। इस सीजन में एमआईएस के तहत एचपीएमसी और हिमफैड ने 13,202.666 मीट्रिक टन सेब की खरीद की है। बागवानों को किए जा रहे भुगतान की प्रक्रिया पर मंत्री ने बताया कि एमआईएस के तहत 30 बैग से कम वाले 11,285 और 100 बैग से कम वाले 2,827 किसानों-बागवानों को सीधे उनके बैंक खातों में पैसा भेज दिया गया है। वहीं, 100 बैग से ज्यादा सेब देने वाले 7,000 बागवानों की पहचान की गई है, जिनमें से 2,000 मामलों का सत्यापन हो चुका है, जबकि 5,000 मामलों में सत्यापन के लिए भूमि रिकॉर्ड मांगे गए हैं।