वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक रिपोर्ट में भारत को प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत विकास संभावनाओं वाला देश बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है।
घरेलू मांग बनी सबसे बड़ी ताकत
सितंबर 2026 में जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का मुख्य आधार घरेलू मांग है। रिपोर्ट में अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, भारत समेत 10 प्रमुख क्षेत्रों का आकलन किया गया है। इसके लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के 92 मुख्य अर्थशास्त्रियों से राय ली गई।
रिपोर्ट के अनुसार, 74 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्री भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। मई में यह आंकड़ा सिर्फ 52 प्रतिशत था। वहीं 98 प्रतिशत विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले 12 महीनों में भारत की वृद्धि दर कम से कम मध्यम या उससे बेहतर रहेगी।
रोजगार और महंगाई को लेकर स्थिति स्थिर
रोजगार के मोर्चे पर 70 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को अगले एक साल में बेरोजगारी दर में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा। आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग की बेरोजगारी दर जुलाई के 5.1 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 5 प्रतिशत पर आ गई। श्रम बल भागीदारी दर भी 55.4 प्रतिशत से बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई।
महंगाई को लेकर भी चिंताएं कम हुई हैं। 55 प्रतिशत विशेषज्ञों को अगले 12 महीनों में मध्यम महंगाई की उम्मीद है, जबकि मई में 61 प्रतिशत विशेषज्ञ उच्च महंगाई की आशंका जता रहे थे। अगस्त में सीपीआई आधारित महंगाई 4.8 प्रतिशत रही, जो आरबीआई के 2-6 प्रतिशत के स्वीकार्य दायरे में है।
मौद्रिक और राजकोषीय नीति में स्थिरता की उम्मीद
67 प्रतिशत विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले एक साल में मौद्रिक नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। अगस्त में आरबीआई ने नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखी थी। राजकोषीय नीति को लेकर भी 72 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने स्थिरता की उम्मीद जताई है।
वैश्विक संस्थान भी बढ़ा रहे हैं अनुमान
रिपोर्ट का सर्वेक्षण 20 अगस्त को पूरा हुआ था। इसके बाद जारी पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में भारत की वृद्धि 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। इस मजबूत प्रदर्शन के बाद मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रफ्तार बनाए रखने की राह पर है।