बड़े रिफाइनरी और अमोनिया उत्पादन क्षमता, व्यापक नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, बंदरगाहों और राज्य स्तर की प्रोत्साहन नीति के दम पर गुजरात भारत में रिन्यूएबल हाइड्रोजन विकास के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। हालांकि, राज्य में अधिकांश बड़े पैमाने की परियोजनाएं अभी व्यवहार्यता आकलन के चरण में हैं। यह जानकारी S&P ग्लोबल की एक रिपोर्ट में दी गई है।
“Gujarat green hydrogen: Turning an ambition into reality” शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि गुजरात के पास कई ऐसे संरचनात्मक फायदे हैं, जो लंबे समय में रिन्यूएबल हाइड्रोजन क्षमता के विकास में मदद कर सकते हैं।
S&P ग्लोबल ने कहा, “भारत रिन्यूएबल हाइड्रोजन उद्योग के विकास और भविष्य के विस्तार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।” रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात मौजूदा औद्योगिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के कारण इस क्षेत्र में विशेष रूप से मजबूत स्थिति में है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की करीब 40 प्रतिशत रिफाइनरी क्षमता और लगभग 30 प्रतिशत अमोनिया क्षमता गुजरात में स्थित है। राज्य में सौर और पवन ऊर्जा की संयुक्त क्षमता करीब 50 गीगावाट है, जबकि भारत का कम से कम 40 प्रतिशत समुद्री व्यापार गुजरात में स्थित बंदरगाहों के जरिए होता है।
ये कारक गुजरात को हाइड्रोजन उत्पादन, परिवहन और निर्यात के लिए संभावित घरेलू मांग के साथ-साथ जरूरी बुनियादी ढांचा भी उपलब्ध कराते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि गुजरात के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग ने दिसंबर 2025 में अपनी हाइड्रोजन रणनीति को अंतिम रूप दिया था। इसमें उत्पादन लक्ष्य तय करने के साथ शुरुआती परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में स्थापित होने वाली पहली 500 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता को कई तरह के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इस नीति में पात्र इलेक्ट्रोलाइजर घटकों, बैटरी स्टोरेज, ऑक्सीजन संग्रहण और जल विलवणीकरण सुविधाओं के लिए पूंजीगत सब्सिडी शामिल है।
गुजरात की नीति हाइड्रोजन की मांग बढ़ाने के लिए भी सहायता प्रदान करती है। इसमें हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशनों, हाइड्रोजन से चलने वाली बसों और भारी वाहनों के लिए सब्सिडी शामिल है। इसके अलावा, औद्योगिक उपयोग में इस्तेमाल होने वाले रिन्यूएबल हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस नेटवर्क में मिश्रित किए जाने वाले हाइड्रोजन की लागत की प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान है।
S&P ग्लोबल ने कहा कि गुजरात ने 2035 तक हर साल 30 लाख मीट्रिक टन रिन्यूएबल हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट में शामिल भारतीय राज्यों की तुलना में यह सबसे बड़ा लक्ष्य है। हालांकि, रिपोर्ट ने इसे “बेहद महत्वाकांक्षी” लक्ष्य बताया है।
नीतिगत समर्थन के बावजूद गुजरात में अधिकांश क्षमता अभी विकास के शुरुआती चरण में है। हालांकि, भारतीय राज्यों में गुजरात में उन्नत चरण में पहुंच चुकी परियोजनाओं की संख्या सबसे अधिक है, लेकिन आंध्र प्रदेश और ओडिशा में उन्नत चरण वाली परियोजनाओं की क्षमता अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में बड़े पैमाने की परियोजनाएं अभी भी व्यवहार्यता के चरण में हैं। हालांकि, भारत के Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition (SIGHT) कार्यक्रम के तहत हाल में मिले समर्थन के बाद इनमें आगे बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्रीय स्तर पर सरकार के National Green Hydrogen Mission का लक्ष्य 2030 तक हर साल 50 लाख मीट्रिक टन रिन्यूएबल हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। वहीं, SIGHT कार्यक्रम को हाइड्रोजन वैल्यू चेन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए शुरुआती तौर पर 170 अरब रुपये का आवंटन मिला है।
S&P ग्लोबल ने अंतरराष्ट्रीय हाइड्रोजन व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 और 2025 में हस्ताक्षरित व्यापार से जुड़े रिन्यूएबल हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव ऑफटेक समझौतों की मात्रा में भारतीय डेवलपर्स की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत रही। 2026 में अब तक हुए सौदों में यह हिस्सेदारी बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है।
गुजरात के लिए रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिमी तट पर स्थित होने से उसे यूरोपीय बाजारों में आपूर्ति के मामले में फायदा मिल सकता है, खासकर अमोनिया निर्यात के जरिए। हालांकि, मध्य पूर्व और चीन से प्रतिस्पर्धा के कारण निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए राज्य और केंद्र सरकार का समर्थन महत्वपूर्ण बना रहेगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि गुजरात में घरेलू औद्योगिक मांग, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, बंदरगाहों, ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचे और नीतिगत समर्थन का संयोजन डेवलपर्स को रिन्यूएबल हाइड्रोजन परियोजनाएं स्थापित करने और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग में अपनी हिस्सेदारी हासिल करने में मदद कर सकता है।