मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर खड़े हुए जमीन विवाद पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बचाव किया तो असदुद्दीन ओवैसी ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि यादव-यादव देखा जाएगा, पार्टी नहीं। यादव-यादव होगा; भाजपा CM के बचाव में खड़े हुए अखिलेश तो क्या बोले ओवैसी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े जमीन विवाद पर हंगामे ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव उनके बचाव में खड़े हो गए। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने धुर विरोधी पार्टी भाजपा के एक मुख्यमंत्री का साथ देकर ना सिर्फ राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया, बल्कि विपक्षी दलों में भी खलबली मच गई। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी अब इस पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि अखिलेश ने यादव होने की वजह से मोहन यादव का बचाव किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यादव होने की वजह से यादव बचाव कर रहा है तो वह जब अल्पसंख्यकों की आवाज उठाते हैं तो शोर क्यों मचाया जाता है?
असदुद्दीन ओवैसी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कई कई दलों में हो रही टूट को लेकर कहा कि सियासत की लैला उनको बनाया जाता है लेकिन सभी टूट-टूटकर भाजपा में जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'देख रहे हैं सब छोड़ छोड़कर भाग रहे हैं। भारत की सियासत का लैला तो हमको बना दिया। हम पर इल्जाम लगाते हैं कि चुनाव लड़ने से फायदा (बीजेपी को) होता है-नुकसान (विपक्ष को) होता है। अब पूरे भाग रहे हैं तो क्या बोलेंगे उनको। लगता है हम से कॉम्पटिशन कर रहे हैं कि बी टीम कौन होता है। बताइए कौन जिम्मेदार है इसका। जो कल तक हमको गाली देते थे वो अब बीजेपी में जाकर बैठे हैं।
ओवैसी ने कहा- यादव होने की वजह से अखिलेश ने किया मोहन का बचाव
ओवैसी ने लगे हाथ अखिलेश यादव को भी लपेटा और उनके 'यादव कार्ड' पर तंच कसते हुए कहा कि उन्हें यादव दिखा, पार्टी नहीं। सांसद ने कहा, 'मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पर एक अखबार ने रिपोर्ट किया कि उनके परिवार को फायदा हुआ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उनके तारीफ में खड़े हो गए। क्यों भाइया? क्योंकि वो भी यादव हैं, वो भी यादव हैं। मतलब यादव-यादव होगा। पार्टी को नहीं देखा जाएगा। और जब ओवैसी संविधान के अनुच्छेद 37 का हवाला देकर राजनीतिक न्याय की बात करता है अल्पसंख्यक समाज के लिए तो पूरा आसमान सिर पर उठा लिया जाता है। भइया को लगा कि वो हमारा भइया है, हम जब गरीब की बात करते हैं तो बोले तुम कौन, हम चौधरी-हम ठेकेदार हैं, यह भी तो हिपोक्रेसी है ना।'