चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वीडिश कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल वार्ता की। इस दौरान उन्होंने स्वीडिश उद्योगपतियों को हरियाणा में आकर निवेश करने का न्यौता दिया। वार्ता में कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेक इन इंडिया और मेड विद स्वीडन के साझा प्रयासों को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने उल्लेख किया कि मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का नया स्वरूप प्रदान किया है। दोनों देशों की साझा पंचवर्षीय कार्य योजना ने सहयोग के लिए स्पष्ट दिशा दी है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में व्यापार और निवेश सहित आर्थिक आदान-प्रदान को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। भारत एशिया में स्वीडन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। सैनी ने हरियाणा की निवेश क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुशल मानव संसाधन, मजबूत औद्योगिक आधार और देश के बड़े बाजारों से उत्कृष्ट संपर्क हरियाणा को निवेशकों के लिए पहली पसंद बनाते हैं। हरियाणा उत्तर भारत के बड़े बाजारों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इन्वेस्ट हरियाणा सिंगल विंडो सिस्टम को और मजबूत किया है, जिससे निवेश प्रक्रिया सरल और तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री ने स्वीडिश कंपनियों के हरियाणा में मौजूद निवेश को भरोसे का उदाहरण बताते हुए कहा कि गुरुग्राम में स्वीडिश कंपनी आइकिया की 3500 करोड़ रुपये की एकीकृत परियोजना राज्य पर उनके विश्वास को दर्शाती है। झज्जर की मेट सिटी में स्वीडन की सब कंपनी अपना कार्ल गुस्ताफ विनिर्माण संयंत्र स्थापित कर रही है। फरीदाबाद में स्वीडिश-स्विस समूह एबीबी की वर्ष 1951 से शुरू हुई विनिर्माण इकाई आधुनिक इलेक्ट्रिक मोटरों का प्रमुख उत्पादक केंद्र है। इसके अलावा, स्वीडिश शिक्षा संस्था कुन स्कापसकोलन का पहला भारतीय विद्यालय वर्ष 2013 में गुरुग्राम में खोला गया था।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई स्वीडिश कंपनी भारत में नया कदम रखने की सोच रही है, तो हरियाणा बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने स्वीडिश कंपनियों को हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट 2027 में भाग लेने और राज्य के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया।