चंडीगढ़ : हरियाणा को ड्रोन निर्माण, एयरोस्पेस और उन्नत तकनीक के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग पर जोर दिया है। इसी क्रम में रूस के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास संत कबीर कुटीर में मुलाकात की। बैठक में हरियाणा में निवेश, तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। खास तौर पर हिसार जिले के सिसाय स्थित ड्रोन सिटी हरियाणा में दो प्रस्तावित भारत-रूस संयुक्त उद्यमों पर विचार-विमर्श किया गया।
200 किलोग्राम तक भार उठाने वाले हेलीकॉप्टर ड्रोन बनाने की योजना
बैठक में रूस की कंपनी ओम्नीटेक एलएलसी और एवीपीएल इंटरनेशनल के बीच प्रस्तावित सहयोग प्रमुख रहा। इसके तहत सिसाय स्थित ड्रोन सिटी में उन्नत हेलीकॉप्टर ड्रोन निर्माण इकाई स्थापित करने की योजना है। प्रस्तावित परियोजना में मानवरहित हेलीकॉप्टर प्रणालियों के निर्माण, असेंबली, अनुसंधान, परीक्षण और तकनीकी विकास के लिए सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
प्रस्ताव के अनुसार, इन हेलीकॉप्टर ड्रोनों की उड़ान क्षमता 250 किलोमीटर तक और भार वहन क्षमता 200 किलोग्राम तक हो सकती है। परियोजना का उद्देश्य उन्नत तकनीक का हस्तांतरण, स्वदेशी विनिर्माण और औद्योगिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
इन ड्रोनों का इस्तेमाल औद्योगिक लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन और दूरदराज के दुर्गम क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जैसे कार्यों में किया जा सकता है। हालांकि, परियोजना के अंतिम स्वरूप और व्यावसायिक उत्पादन की स्थिति की पुष्टि आगे की औपचारिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
GPS के बिना भी काम करने वाली नेविगेशन तकनीक पर जोर
भारत-रूस सहयोग की दूसरी प्रस्तावित परियोजना ड्रोन नेविगेशन तकनीक से जुड़ी है। बैठक में 4GNSS एलएलसी/ओरिएंट सिस्टम्स ग्रुप के साथ ऐसी तकनीक विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई, जो GPS/GNSS उपग्रह संकेत उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी ड्रोन को नेविगेशन में सहायता दे सके।
इस परियोजना में भारतीय सेमीकंडक्टर चिप्स के इस्तेमाल, स्वदेशी तकनीक विकसित करने और भारत में ही विनिर्माण की संभावनाओं को तलाशने पर जोर दिया गया। यदि प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलता है, तो इससे स्वायत्त नेविगेशन, एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत ड्रोन अनुसंधान को बढ़ावा मिल सकता है।
ड्रोन निर्माण के लिए ₹58.51 करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज
हरियाणा सरकार पहले ही राज्य में ड्रोन और एयरोस्पेस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा चुकी है। हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन बोर्ड की 19वीं बैठक में एआईटीएमसी वेंचर्स लिमिटेड के लिए ₹58.51 करोड़ के विशेष प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी गई थी। यह मंजूरी हरियाणा उद्यम एवं रोजगार नीति, 2020 के तहत हिसार जिले में ड्रोन और उनके कलपुर्जों के निर्माण के लिए औद्योगिक हब विकसित करने के उद्देश्य से दी गई थी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 28 सितंबर 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में अनुसंधान को प्राथमिकता देने, स्टार्टअप्स को सुविधाएं उपलब्ध कराने और युवाओं के तकनीकी कौशल विकास को मजबूत करने के निर्देश भी दिए थे। राज्य सरकार का लक्ष्य हरियाणा को ड्रोन निर्माण और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
सितंबर 2025 में रखी गई थी ड्रोन सिटी की आधारशिला
हिसार जिले के सिसाय में स्थापित की जा रही ड्रोन सिटी हरियाणा को इसी रणनीति की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। परियोजना की आधारशिला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सितंबर 2025 में रखी थी। इसके प्रथम चरण का उद्घाटन मई 2026 में हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने किया था।
रूस के प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा पहुंचने से पहले 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू से भी मुलाकात की थी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने सिसाय स्थित ड्रोन सिटी का दौरा कर वहां की विनिर्माण, अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण सुविधाओं की जानकारी ली।
छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने की चर्चा
रूस के चार और भारत के दो वरिष्ठ प्रतिनिधियों सहित छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में भाग लिया। रूसी पक्ष से स्कोल्कोवो फाउंडेशन के निदेशक लियोनिद आर्टेमोव, प्रोजेक्ट मैनेजर अलेक्जेंडर जापोरोज्स्की, ओम्नीटेक एलएलसी के सीईओ एलेक्सी उर्बान्स्की तथा 4GNSS एलएलसी/ओरिएंट सिस्टम्स ग्रुप के सीईओ एवं सह-संस्थापक सर्गेई लेबेदेव शामिल रहे।
भारतीय पक्ष से ड्रोन टेक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कुमार आनंद और एवीपीएल इंटरनेशनल के संस्थापक एवं चेयरमैन दीप सिंह सिसाय उपस्थित रहे।
बैठक में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और मुख्यमंत्री के ओएसडी विवेक कालिया सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
प्रस्तावित संयुक्त उद्यमों को अंतिम रूप मिलने पर हरियाणा में उन्नत ड्रोन निर्माण, तकनीक हस्तांतरण और अनुसंधान के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे राज्य के औद्योगिक तंत्र को मजबूती मिलने के साथ उच्च तकनीक वाले विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।