चंडीगढ़/मोहाली : पंजाबी फिल्म जगत और दुनिया भर में फैले उनके लाखों प्रशंसकों के लिए आज एक बेहद दुखद खबर आई। अपनी बेमिसाल कॉमेडी और अनूठे अंदाज से दशकों तक लोगों के दिलों पर राज करने वाले, दिग्गज अभिनेता और कॉमेडियन (Comedian) जसविंदर भल्ला का आज सुबह निधन हो गया। वह 65 वर्ष के थे और पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर से पूरी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।
कब और कहाँ होगा अंतिम संस्कार?
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, जसविंदर भल्ला का अंतिम संस्कार कल, यानी शनिवार, 23 अगस्त को दोपहर 12 बजे मोहाली के नजदीक बलोंगी (Balongi) स्थित शमशान घाट पर किया जाएगा। उनके निधन की खबर मिलते ही, उनके प्रशंसक और इंडस्ट्री के लोग सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
एक प्रोफेसर, जो बन गया कॉमेडी का बादशाह
जसविंदर भल्ला सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक उच्च शिक्षित अकादमिक भी थे, जो उन्हें बाकी कलाकारों से बिल्कुल अलग बनाता है।
1. अकादमिक करियर: अभिनय में आने से पहले, वह पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना में एक प्रोफेसर थे और वहां कृषि पत्रकारिता, भाषा और संस्कृति विभाग के प्रमुख के रूप में भी कार्य कर चुके थे।
2. 'छनकाटा' से शुरुआत: उनके करियर की शुरुआत 1980 के दशक के अंत में ऑडियो कैसेट सीरीज 'छनकाटा' (Chhankata) से हुई थी। इस सीरीज में उनके द्वारा निभाए गए किरदार, जैसे कि 'चाचा चतरा', पंजाब के हर घर में मशहूर हो गए थे और यहीं से उनकी कॉमेडी के एक नए युग की नींव पड़ी।
फिल्मों में कॉमेडी को दी नई परिभाषा
जसविंदर भल्ला ने अपने फिल्मी करियर में 150 से अधिक फिल्मों में काम किया और पंजाबी सिनेमा में कॉमेडी के मायने ही बदल दिए। उनकी कुछ यादगार फिल्में हैं:
1. कैरी ऑन जट्टा (Carry on Jatta): इस फिल्म में उनके किरदार ने उन्हें एक नई पीढ़ी के बीच सुपरस्टार बना दिया।
2. नौकर वोहटी दा (Naukar Vahuti Da)
3. जट्ट एंड जूलिएट (Jatt & Juliet)
4. डैडी कूल मुंडे फूल (Daddy Cool Munde Fool)
5. महाउल ठीक है (Mahaul Theek Hai)
उनकी खासियत उनकी कॉमिक टाइमिंग (Comic Timing), चेहरे के हाव-भाव और पंजाबी बोली पर उनकी पकड़ थी। वह किसी भी किरदार में जान डाल देते थे और उनके डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
एक ऐसा खालीपन, जो कभी नहीं भरेगा
जसविंदर भल्ला का निधन पंजाबी सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वह सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं, बल्कि एक ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने अपनी कला से समाज के कई मुद्दों पर भी व्यंग्य किया। उनका जाना एक ऐसे युग का अंत है, जिसने पंजाबियों को हंसना और जीवन को हल्के-फुल्के अंदाज में जीना सिखाया। उनके किरदार और उनकी हंसी हमेशा उनके चाहने वालों के दिलों में जिंदा रहेगी।