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राष्ट्रीय

मनरेगा ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा का आधार: वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इस योजना में 440.7 लाख महिलाओं ने लिया भाग

27 अगस्त, 2025 05:22 PM

मनरेगा, भारत में ग्रामीण रोज़गार और विकास की आधारशिला बना हुआ है। रिकॉर्ड बजटीय मदद, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और पारदर्शिता तथा जवाबदेही के लिए प्रौद्योगिकी के एकीकरण के साथ, यह योजना न केवल आजीविका प्रदान करती है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को भी मज़बूत बनाती है। इसका लगातार विकसित होता ढांचा समावेशी और सतत् ग्रामीण विकास के प्रति एक मज़बूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।पिछले पांच वित्तीय वर्षों में मनरेगा के अंतर्गत महिलाओं की भागीदारी लगातार 50% से ऊपर रही है। इसमें लगातार वृद्धि देखी गई है, जो वित्त वर्ष 2013-14 में 48% से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 58.15% हो गई है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इस योजना में 440.7 लाख महिलाओं ने भाग लिया। यह ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने में मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दरअसल, भारत सरकार एक गरिमामय ग्रामीण जीवन की परिकल्पना करती है, जहां भारत के ग्रामीण समुदायों के लोग अपनी स्वयं की व्यवस्था के तहत विकास के अवसरों तक पहुंच सकें। यह परिकल्पना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 के माध्यम से साकार हो रही है। यह एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका मकसद हर ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, उन्हें एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटी मजदूरी का रोजगार देकर आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है।

असम में, 2020 के दौरान, सिंचाई के पानी की कमी के कारण किसानों को कृषि सबंधी गतिविधियां करने में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे फसल की पैदावार काफी प्रभावित हुई। स्थानीय समुदाय की ज़रुरतों को पूरा करने के लिए, मनरेगा योजना के तहत एक वितरक नहर का निर्माण किया गया। पंजीकृत कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों द्वारा ईंटों से बनाई गई इस नहर ने बारिश के पानी को प्रभावी ढंग से प्रवाहित करने में मदद की। पूरा होने पर, इसने आस-पास के खेतों को पर्याप्त सिंचाई प्रदान की, आजीविका में सुधार किया और कुल 1,134 मानव-दिवसों का स्थानीय रोजगार भी सृजित किया।

सामाजिक समावेशन पर केंद्रित, यह योजना अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिला-प्रधान परिवारों और अन्य कमजोर समूहों को सक्रिय रूप से सहायता प्रदान करती है। यह योजना पारिस्थितिक पुनर्स्थापन को बढ़ावा देने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने वाली परियोजनाओं को प्रोत्साहित करते हुए, सतत् विकास और पर्यावरण संरक्षण पर भी ज़ोर देती है। जल संरक्षण, वनीकरण और मृदा स्वास्थ्य सुधार जैसी पहलों के माध्यम से, मनरेगा एक हरित और अधिक सुदृढ़ ग्रामीण भारत की नींव रख रहा है।

गौरतलब हो, वित्त वर्ष 2013-14 में, मनरेगा के लिए बजट आवंटन 33,000 करोड़ रुपये था। दूसरी ओर, वित्त वर्ष 2025-26 (बजट अनुमान) के लिए, सरकार ने 86,000 करोड़ रुपये का उच्च आवंटन बरकरार रखा है, जो इस योजना की शुरुआत के बाद से अब तक का सबसे अधिक आवंटन है।

महात्मा गांधी नरेगा श्रमिकों के कौशल आधार को उन्नत करने के लिए, भारत सरकार ने दिसंबर 2019 में “उन्नति परियोजना” शुरू की। इस परियोजना का मकसद इन श्रमिकों को ऐसे कौशल प्रदान करके उनके आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है, जो उन्हें स्व-रोज़गार या वेतनभोगी रोज़गार के ज़रिए आंशिक रोज़गार से पूर्ण रोज़गार में बदलने में सक्षम बनाते हैं। उन्नति परियोजना का लक्ष्य 2 लाख मनरेगा श्रमिकों का कौशल विकास करना है, जिससे स्थायी आय सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले। 31 मार्च 2025 तक कुल 90,894 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया।

मनरेगा के उद्देश्य -मनरेगा के अंतर्गत लक्ष्य

• ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को मांग के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिन का अकुशल शारीरिक कार्य प्रदान करना, जिससे निर्धारित गुणवत्ता और स्थायित्व वाली उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण हो सके।

• गरीबों के आजीविका संसाधन आधार को मज़बूत बनाना।

• सामाजिक समावेशन को सक्रिय रूप से सुनिश्चित करना और

• पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को मज़बूत बनाना।

मनरेगा के अंतर्गत जारी धनराशि, परिवार और सृजित व्यक्ति दिवस

चालू वित्त वर्ष 2025-26 में, 23.07.2025 तक, इस योजना के तहत 45,783 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 37,912 करोड़ रुपये मजदूरी के भुगतान के लिए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में, कुल 15.99 करोड़ परिवार मनरेगा के अंतर्गत पंजीकृत थे, जिससे 290.60 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार सृजित हुआ।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) एक मांग-आधारित वेतन-आधारित रोज़गार कार्यक्रम है, जो किसी और बेहतर रोज़गार के अवसर उपलब्ध न होने पर एक विकल्प के रूप में कार्य करता है। भारत सरकार इस योजना के अंतर्गत सभी इच्छुक और पात्र ग्रामीण परिवारों को मांग के अनुसार पर्याप्त रोज़गार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, मनरेगा के तहत काम की मांग करने वाले 99.79% ग्रामीण परिवारों को सफलतापूर्वक रोज़गार प्रदान किया गया, जो इस योजना के मज़बूत नतीजों को दर्शाता है।

मनरेगा के तहत फर्जी जॉब कार्ड रद्द करना

महात्मा गांधी नरेगा के तहत जॉब कार्ड सत्यापन एक सतत् प्रक्रिया है, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा आधार के दोहरीकरण को हटाने के साधन के रूप में उपयोग करके की जाती है। फर्जी या डुप्लिकेट प्रविष्टियों, काम करने के अनिच्छुक परिवारों, स्थायी रूप से पलायन कर चुके परिवारों, या एकमात्र जॉब कार्डधारक की मृत्यु हो जाने की स्थिति में उचित सत्यापन के बाद जॉब कार्ड रद्द या हटाए जा सकते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में मनरेगा के तहत हटाए गए जॉब कार्डों की संख्या 58,826 है।

मनरेगा की प्रभावशीलता, दक्षता और प्रासंगिकता में सुधार के लिए उठाए गए कदम

• मिशन अमृत सरोवर– वित्त वर्ष 2022 में शुरू किया गया, जिसका मकसद जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पूरे भारत में 50,000 जलाशयों का निर्माण या पुनरुद्धार करना है। अपने लक्ष्य को भी पार करते हुए, 68,000 से अधिक अमृत सरोवर विकसित किए गए, जो एक सफल “संपूर्ण सरकार” के दृष्टिकोण को दर्शाता है।

• सामाजिक ऑडिट- योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी ग्राम पंचायतों का सामाजिक ऑडिट वर्ष में कम से कम दो बार किया जाना चाहिए।

• आधार आधारित भुगतान प्रणाली– पारदर्शिता बढ़ाने और मजदूरी भुगतान में लीकेज को कम करने के लिए कार्यक्रम के तहत इसे अपनाया गया है। इस व्यवस्था के ज़रिए, 99.6% से अधिक मजदूरी के भुगतान, इलेक्ट्रॉनिक रूप से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में जमा किए जाते हैं, जिससे धन का समय पर और जवाबदेह वितरण हो पाता है। कुल 12.08 करोड़ सक्रिय श्रमिकों में से, अब तक 12.03 करोड़ सक्रिय श्रमिकों के आधार कार्ड जोड़े जा चुके हैं।

• सिक्योर – ग्रामीण रोज़गार दरों के उपयोग की अनुमान गणना के लिए सॉफ़्टवेयर: इस एप्लिकेशन का उपयोग योजना के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों की गणना का अनुमान लगाने के लिए किया जा रहा है।

• युक्तधारा पोर्टल- इसे सरल भू-स्थानिक नियोजन के लिए इसरो-एनआरएससी के सहयोग से विकसित किया गया था। यह अधिक प्रभावी और लक्षित विकास के लिए स्थानीय ज़रुरतों को उपग्रह-आधारित आँकड़ों के साथ एकीकृत करने में मदद करता है।

• जीआईएस-आधारित नियोजन-इसका उपयोग रिज-टू-वैली दृष्टिकोण के रूप में किया जाता है, जिसे सभी ग्राम पंचायतों में रिमोट सेंसिंग के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।

• जलदूत ऐप-ग्राम रोज़गार सहायकों (जीआरएस) को वर्ष में दो बार, मानसून से पहले और मानसून के बाद, चयनित कुओं के जल स्तर को मापने और रिकॉर्ड करने में सक्षम बनाता है, ताकि भूजल निगरानी और संसाधन नियोजन में मदद मिल सके।

• जनमनरेगा ऐप- महात्मा गांधी नरेगा के कार्यान्वयन के बारे में नागरिकों को सही जानकारी के साथ-साथ एक फीडबैक तंत्र में सहायता करता है।

• राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) ऐप- कार्यस्थलों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए श्रमिकों की वास्तविक समय में उपस्थिति और जियोटैग की गई तस्वीरें रिकॉर्ड करता है।

• जियो-मनरेगा-योजना के तहत सृजित संपत्तियों की जियो-टैगिंग की सुविधा प्रदान करता है, जिससे संपत्ति निर्माण के “दौरान” और “बाद” के चरणों में निगरानी, योजना और जवाबदेही में सुधार होता है। अब तक कुल 6.36 करोड़ संपत्तियों को जियो-टैग किया जा चुका है।

मनरेगा के अंतर्गत हालिया प्रगति

• राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा लगभग 97.81% निधि हस्तांतरण आदेश (एफटीओ) समय पर जारी किए जा रहे हैं, जिससे मार्च 2025 तक समय पर मज़दूरी का भुगतान हो पाया है।

• मार्च 2025 तक 86.98 लाख से अधिक परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ है, जो ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने में इस योजना की भूमिका को दर्शाता है।

• मार्च 2025 तक करीब 97% सक्रिय श्रमिकों को आधार भुगतान ब्रिज प्रणाली से जोड़ दिया गया है।

• मंत्रालय ने जॉब कार्ड सत्यापन, 7 सरलीकृत रजिस्टरों को अपनाना, मज़बूत सामाजिक और आंतरिक लेखा परीक्षा, और भूमिहीन मज़दूरों का सक्रिय समावेशन जैसे सुशासन सुधार लागू किए हैं। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नागरिक सूचना बोर्ड स्थापित किए गए हैं।

• 13 मंत्रालयों के साथ समन्वय के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत भवनों और सीमा सड़क संपर्क जैसे बुनियादी ढाँचों को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और अन्य के सहयोग से सहायता मिलती है।

• मार्च 2025 तक कुल व्यय का करीब 44.14% कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर खर्च किया जाएगा, जो दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदम

• अधिनियम के प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए दीवार पर पेंटिंग और सामुदायिक पहुंच जैसे सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान शुरू करना।

• मांग पंजीकरण प्रणाली के दायरे और कवरेज का विस्तार करना, यह सुनिश्चित करना कि काम की कोई भी वास्तविक मांग पंजीकृत होने से छूट ना जाए।

• ग्राम सभा में तैयार और अनुमोदित रोज़गार योजनाओं के साथ सहभागी नियोजन को सुगम बनाना, पारदर्शिता और स्थानीय स्वामित्व को बढ़ावा देना।

• मनरेगा के तहत अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, काम की माँग का पंजीकरण सुनिश्चित करने और शिकायतों का समाधान करने के लिए ग्राम स्तर पर ‘रोज़गार दिवस’ का आयोजन करना।

दरअसल, आने वाले वक्त में, समय पर वित्तीय मदद देना, प्रभावी शिकायत निवारण और अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ एकीकरण पर लगातार ध्यान केंद्रित करना, मनरेगा जैसी योजनाओं के प्रभाव को बढ़ाने के लिए ज़रुरी होगा। वहीं, सामाजिक लेखा-परीक्षणों को मज़बूत करने, जॉब कार्ड की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने और प्रोजेक्ट उन्नति जैसी पहलों के ज़रिए कौशल विकास को बढ़ावा देने से, कार्यान्वयन दक्षता और ग्रामीण परिवारों के लिए दीर्घकालिक आजीविका परिणाम दोनों और बेहतर हो सकते हैं।

 
 

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