वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण की बुनियाद केवल विनिर्माण पर नहीं, बल्कि नवाचार, डिजाइन और तकनीक के विकास पर होनी चाहिए। उन्होंने कारोबार जगत से ‘Made in India’ से आगे बढ़कर ‘Imagined in India’ की सोच अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत में ऐसे उत्पाद तैयार किए जाने चाहिए, जिनकी केवल मैन्युफैक्चरिंग ही देश में न हो, बल्कि उनकी कल्पना, डिजाइन और तकनीकी विकास भी भारत में हो और इसके बाद उन्हें दुनियाभर के बाजारों में पहुंचाया जाए।
निर्मला सीतारमण ने यहां All India Management Association (AIMA) के 53वें राष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।
डिजाइन और तकनीक से बढ़ेगा आर्थिक मूल्य
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के पास बड़े बाजार का आकार, उद्यमशीलता की ऊर्जा और संस्थागत क्षमता मौजूद है, जिससे देश आर्थिक वृद्धि के और ऊंचे स्तर हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत को डिजाइन, इंजीनियरिंग, पेटेंट, सॉफ्टवेयर, तकनीक और विशेष ज्ञान से पैदा होने वाले अधिक मूल्य को भी देश में ही हासिल करना होगा।
सीतारमण ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल यहां उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। देश में उत्पादों की कल्पना, डिजाइन और तकनीकी विकास किया जाए और फिर उन्हें दुनिया के बाजारों में पहुंचाया जाए।
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि इन क्षमताओं को लंबे समय तक देश की ताकत में बदलने के लिए प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होगा।
पारिवारिक कारोबार में पेशेवर प्रबंधन पर जोर
वित्त मंत्री ने पारिवारिक स्वामित्व वाले कारोबारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कारोबार के स्वामित्व और प्रबंधन के बीच स्पष्ट अंतर रखने की जरूरत बताई।
उन्होंने जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा, उत्तराधिकार की पहले से योजना और विवादों के समाधान के लिए सक्रिय व्यवस्था बनाने पर जोर दिया।
सीतारमण ने AIMA से पारिवारिक कारोबारों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करने का भी आग्रह किया। इनमें कारोबार का संचालन, उत्तराधिकार की योजना, अधिकारों का बंटवारा और विवाद प्रबंधन जैसे विषय शामिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इन बुनियादी व्यवस्थाओं को मजबूत करने से कारोबार को कई पीढ़ियों तक टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि असली उपलब्धि केवल यह नहीं है कि भारत कितने यूनिकॉर्न तैयार करता है, बल्कि यह है कि इनमें से कितने लंबे समय तक टिकते हैं और आज के स्टार्टअप भविष्य की बड़ी कंपनियों में बदलते हैं।