भारत और कुवैत के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर नई दिल्ली में आज मंगलवार को विदेश कार्यालय परामर्श के सातवें दौर की बैठक हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने राजनीतिक, व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने पर चर्चा की। बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (गल्फ) असीम महाजन और कुवैत के विदेश मंत्रालय में एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीह ईसा जोहर हयात ने की। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
बैठक में यह भी तय हुआ कि दोनों पक्ष दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुवैत यात्रा के दौरान बने रोडमैप के कार्यान्वयन पर मिलकर काम जारी रखेंगे। साथ ही, संयुक्त आयोग के तहत गठित संयुक्त कार्य समूहों की बैठकें जल्द से जल्द आयोजित करने पर सहमति बनी। अधिकारियों ने यह भी निर्णय लिया कि अगली विदेश कार्यालय परामर्श बैठक कुवैत में आपसी सहमति से तय की जाने वाली तारीख पर होगी। इस दौरान समीह ईसा जोहर हयात ने परराष्ट्र मंत्रालय के सचिव (सीपीवी एंड ओआईए) अरुण कुमार चटर्जी से भी मुलाकात की।
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि भारत और कुवैत के बीच ऐतिहासिक और बहुआयामी संबंध रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा। वहीं, कुवैत में रह रहे दस लाख से अधिक भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच मजबूत जन-से-जन संबंधों का उदाहरण हैं। उल्लेखनीय है कि भारत 1961 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद कुवैत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले पहले देशों में से एक था। पहले भारत वहां एक वाणिज्य आयुक्त के माध्यम से प्रतिनिधित्व करता था। दिसंबर 2024 की प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किया गया था।