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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: देश में मछली की उत्पादकता 2.3 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 3.3 टन प्रति हेक्टेयर हुई

10 सितंबर, 2026 01:52 PM

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत 10 सितंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। यह मत्स्य क्षेत्र पर केंद्रित और सतत विकास योजना है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक 05 वर्ष की अवधि के लिए सभी राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में कार्यान्वित की जा रही है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को मछली उत्पादन, उत्पादकता और गुणवत्ता से लेकर प्रौद्योगिकी, कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे और विपणन तक मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण अंतराल को दूर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उद्देश्य मूल्य श्रृंखला को आधुनिक बनाना और मजबूत करना, पता लगाने की क्षमता को बढ़ाना और एक मजबूत मत्स्य प्रबंधन ढांचा स्थापित करना है, साथ ही साथ मछुआरों और मछली किसानों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण को सुनिश्चित करना है।

भारत में मछली की उत्पादकता वित्त वर्ष 2015 के 2.3 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर वित्त वर्ष 2019 में 3.3 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है। यह वृद्धि सरकार द्वारा चलाई गई प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) और ‘नीली क्रांति’ जैसी पहलों के कारण संभव हुई है, जिससे कुल मछली उत्पादन में भी भारी उछाल आया है।

इस योजना के कार्यान्वयन से सरकार का लक्ष्य फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 20-25% से घटाकर 10% करना, मछुआरों और मछली पालकों की आय को दोगुना करना और 55 लाख अतिरिक्त प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रमुख लक्ष्य

  • वित्त वर्ष 2019 में मछली उत्पादन 13.75 मिलियन मीट्रिक टन था, जिसे वित्त वर्ष 2025 तक बढ़ाकर 22 मिलियन मीट्रिक टन करना है।
  • मत्स्यपालन की उत्पादकता को तीन टन प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर पांच टन प्रति हेक्टेयर करना।
  • घरेलू स्तर पर मछली की खपत को प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम से बढ़ाकर 12 किलोग्राम करना।
  • कृषि के सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में मत्स्य पालन क्षेत्र का योगदान वित्त वर्ष 2019 में 7.28% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 तक लगभग 9% हो जाएगा।
  • वित्त वर्ष 2019 में निर्यात राजस्व 46,589 करोड़ रुपये (6.37 अरब अमेरिकी डॉलर) से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 तक 1,00,000 करोड़ रुपये (13.68 अरब अमेरिकी डॉलर) तक दोगुना करने का लक्ष्य।
  • फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को लगभग 10% तक कम करना।
  • मूल्य श्रृंखला में 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित करना।

यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20,750 करोड़ रुपये के निवेश के साथ लागू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत अन्य बातों के साथ-साथ मछुआरों एवं मत्स्य पालकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों का प्रावधान किया गया है, जिनमें शामिल हैं-

(i) दुर्घटना की स्थिति में 5.00 लाख रुपये तक का समूह दुर्घटना बीमा कवर (मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता पर), 2.50 लाख रुपये (आंशिक स्थायी विकलांगता पर) तथा 25,000 रुपये (दुर्घटनाजनित अस्पताल में भर्ती होने पर); और (ii) मछली संसाधनों के संरक्षण हेतु मत्स्य बंदी/अवधि (लीन पीरियड) के दौरान सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े पारंपरिक मछुआरा परिवारों को आजीविका एवं पोषण सहायता, जिसके अंतर्गत प्रति मछुआरा 3,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने वर्ष 2019 से मछुआरों एवं मत्स्य पालकों को उनकी कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सुविधा का विस्तार भी किया है। मत्स्य क्षेत्र में अवसंरचना संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2018-19 में 7,522.48 करोड़ रुपये के कुल कोष आकार के साथ मात्स्यिकी और एक्यूकुल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) की स्थापना भी की है।

यद्यपि पिछले पांच वर्षों में मछुआरों की औसत आय का आकलन करने के लिए कोई विशिष्ट सर्वेक्षण नहीं किया गया है, तथापि भारत सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों से मत्स्य उत्पादन, उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि हुई है, जिससे उपभोक्ताओं की मांग एवं पसंद की पूर्ति के साथ-साथ निर्यात में भी वृद्धि हुई है, और इसके परिणामस्वरूप मछुआरों एवं मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि हुई है।

इसके अलावा, भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 में मछली किसानों और मछुआरों को उनकी कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करने के लिए ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (केसीसी) की सुविधा का विस्तार किया। इस योजना की शुरुआत से लेकर अब तक, मछुआरों और मछली किसानों को कुल 5,01,900 किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए हैं, जिसके तहत कुल ₹3,692.73 करोड़ का वितरण किया गया है।

केंद्र सरकार का मत्स्य पालन विभाग, तटीय मछुआरों के लिए टिकाऊ आर्थिक और आजीविका के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से ‘जलवायु-लचीले तटीय मछुआरा गांव’ (सीआरसीएफवी) कार्यक्रम लागू कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत मत्स्य पालन से जुड़े बुनियादी ढांचे का विकास किया जाता है, जलवायु के प्रति लचीलेपन को बढ़ावा दिया जाता है, सुरक्षा और संरक्षा को बढ़ाया जाता है, पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाता है, स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया जाता है और तटीय गांवों में जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार किया जाता है।

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