बालोतरा (पचपदरा) : राजस्थान के आर्थिक भविष्य का केंद्र मानी जाने वाली HPCL पचपदरा रिफाइनरी में 20 अप्रैल को लगी भीषण आग ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गहरा झटका दिया है। यह हादसा उस समय हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (21 अप्रैल) को इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने वाले थे। घटना के बाद प्रधानमंत्री का दौरा स्थगित कर दिया गया है।
हादसे की मुख्य बातें : रिफाइनरी के 'दिल' में लगी आग
यूनिट : आग रिफाइनरी की सबसे महत्वपूर्ण इकाई क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में लगी, जहां कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल में बदलने की प्रक्रिया शुरू होती है।
स्थिति : रिफाइनरी का 92% काम पूरा हो चुका था और ट्रायल रन के दौरान ही यह हादसा हो गया।
नुकसान : विशेषज्ञों के अनुसार, यूनिट की मरम्मत और डैमेज असेसमेंट में 1 से 6 महीने का समय लग सकता है।
13 साल का संघर्ष : 37 हजार करोड़ से 79 हजार करोड़ तक पहुँचा बजटपचपदरा रिफाइनरी का सफर चुनौतियों और राजनीतिक खींचतान से भरा रहा है:
2013 (शिलान्यास) : सोनिया गांधी ने शिलान्यास किया, लागत ₹37,230 करोड़ तय थी।
2018 (कार्य शुभारंभ) : प्रधानमंत्री मोदी ने फिर से काम शुरू कराया, लागत बढ़कर ₹43,129 करोड़ हुई।
2026 (वर्तमान स्थिति) : बार-बार देरी और कोविड के कारण अब प्रोजेक्ट की लागत ₹79,459 करोड़ तक पहुँच चुकी है।
बड़ा आर्थिक घाटा : हर महीने हजारों करोड़ का रेवेन्यू लॉस
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिफाइनरी के कॉमर्शियल ऑपरेशन में होने वाली हर महीने की देरी राजस्थान और देश के लिए बड़ा नुकसान है:
संभावित रेवेन्यू : जुलाई 2026 से शुरू होने वाले उत्पादन से मासिक ₹50,000 से ₹80,000 करोड़ का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद थी।
सवालिया निशान : दुनिया की बेस्ट टेक्नोलॉजी और इंजीनियर्स की मौजूदगी के बावजूद यह हादसा कैसे हुआ, इसकी टेक्निकल ऑडिट रिपोर्ट का इंतज़ार है।
विशेषज्ञों की राय : हालांकि उपकरण बीमा (Insurance) के तहत कवर होते हैं, लेकिन फेब्रिकेशन और दोबारा इंस्टॉलेशन में लगने वाला समय उत्पादन और विकास की गति को पीछे धकेल देता है।