चंडीगढ़ : भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब में नशे से जुड़ी लगातार सामने आ रही घटनाओं पर भगवंत मान सरकार को घेरते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल की तीन महीने में नशा खत्म करने की गारंटी आज पंजाब के युवाओं और परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है। कपूरथला में 20 वर्षीय गुरविंदर सिंह की संदिग्ध नशे की ओवरडोज से मौत, 10 वर्षीय बच्चे का नशा करते हुए वीडियो और 2 नाबालिग भाइयों को बचाए जाने की घटनाएं बताती हैं कि पंजाब में नशे का संकट कितना गहरा हो चुका है। जिस प्रदेश की युवा पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने का वादा किया गया था, वहां माता-पिता अपने बच्चों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकार के दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
चुघ ने कहा कि गाजीपुर गांव के गुरविंदर सिंह को टोटी गांव में एक ट्यूबवेल के पास अचेत अवस्था में पाया गया और अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया गया। उसके भाई अमनदीप सिंह को भी नशे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतक के पिता ने क्षेत्र में खुलेआम नशे की बिक्री और युवाओं की मौतों पर चिंता जताई। इसी बीच, 10 वर्षीय बच्चे का नशा करते हुए वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने 10 और 13 वर्ष के दो भाइयों को बचाया। चुघ ने कहा कि जब नशे का जाल मासूम बच्चों तक पहुंच रहा हो, तब सरकार को बताना होगा कि उसकी नशामुक्ति मुहिम का जमीन पर क्या परिणाम निकला है।
चुघ ने कहा कि पंजाब की जनता के सवाल सीधे हैं। 3 महीने में नशा खत्म करने की गारंटी कहां गई? नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की मौत पर जवाबदेही कौन लेगा? मोहनजीत सिंह की पिटाई और गुलजार सिंह व बिक्रमजीत सिंह की हत्याओं के मामलों में न्याय और जवाबदेही कब सुनिश्चित होगी? इन गंभीर मामलों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। पंजाब के लोगों को आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए और नशा तस्करी के नेटवर्क पर ठोस कार्रवाई चाहिए।
चुघ ने आगे कहा कि टोटी और लटियांवाल जैसे इलाकों में नशे की समस्या की पहचान होने के बावजूद सप्लाई चेन को तोड़ना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। नशे की बिक्री करने वालों से लेकर उनके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार बताए कि नशा तस्करी के बड़े नेटवर्क पर कितनी कार्रवाई हुई और नशे की गिरफ्त में आए बच्चों व युवाओं के उपचार तथा पुनर्वास के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था की गई है। नशे के खिलाफ केवल अभियान चलाने की घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, परिणाम जनता को दिखाई देने चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद के मुद्दे को कानून-व्यवस्था से अलग करके नहीं देखा जा सकता। जेल के भीतर से इंटरव्यू और पुलिस-गैंगस्टर गठजोड़ को लेकर उठे सवालों पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। प्रदेश में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अपराध के नेटवर्क पर कानून के अनुसार कार्रवाई करना सरकार की जिम्मेदारी है। पंजाब की जनता जानना चाहती है कि अपराध और नशे के खिलाफ कार्रवाई में जवाबदेही किस स्तर पर तय की जा रही है।
चुघ ने कहा कि मान सरकार को पंजाब के बढ़ते कर्ज, अवैध खनन और कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते पर भी जवाब देना होगा। राज्य का कर्ज ₹5 लाख करोड़ के पार पहुंचने के बीच कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया डीए कब जारी होगा? अवैध खनन रोकने और उससे ₹20,000 करोड़ की आय के दावों का हिसाब कहां है? सरकारी संस्थानों की बिक्री पर सरकार स्थिति स्पष्ट करे। धान की खरीद में 180 लाख मीट्रिक टन धान पर ₹200 प्रति क्विंटल की कटौती से किसानों को कथित ₹3,600 करोड़ के नुकसान के आरोपों पर भी जवाब दिया जाना चाहिए। पंजाब के किसानों, कर्मचारियों और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
चुघ ने मांग की कि गुरविंदर सिंह की मौत के मामले में नशे की सप्लाई चेन की स्वतंत्र जांच समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए और जांच में सामने आने वाले दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो। नशे की गिरफ्त में आए बच्चों और युवाओं को उपचार, पुनर्वास और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि दूसरे परिवारों को ऐसी त्रासदी से न गुजरना पड़े। उन्होंने कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाने के नाम पर सत्ता हासिल करने वालों को अब अपने वादों का हिसाब देना होगा। जब 20 साल के युवा की जान जा रही हो, 10 साल के बच्चे नशे की चपेट में आ रहे हों और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के मामलों में जवाबदेही के सवाल उठ रहे हों, तब भगवंत मान को विधानसभा में जवाब देना होगा कि केजरीवाल की गारंटी का क्या हुआ। पंजाब को खोखले वादे नहीं, नशा माफिया पर निर्णायक कार्रवाई और अपनी युवा पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य की जरूरत है।