करनाल : यूनाइटेड फूड राइस मिल में सरकार द्वारा आवंटित धान में गड़बड़ी के मामले में पुलिस ने मिलर नसीब सिंह को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह मामला उस समय सामने आया था, जब मिल को आवंटित 3772 एमटी धान में से 1005 एमटी कम मिला था। इस संबंध में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के तत्कालीन इंस्पेक्टर रणधीर सिंह ने केस दर्ज कराया था।
निरीक्षण में गायब मिला था 1005 मीट्रिक टन धान
यह पूरा मामला सरकारी धान के स्टॉक की चेकिंग के दौरान सामने आया था। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा मिल को कुल 3,772 मीट्रिक टन (MT) धान आवंटित किया गया था। लेकिन जब विभाग की टीम ने मिल के स्टॉक का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया, तो उसमें से 1,005 मीट्रिक टन धान गायब (कम) मिला। इस भारी गड़बड़ी को लेकर विभाग के तत्कालीन इंस्पेक्टर रणधीर सिंह ने मिल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
विभाग ने की 2.47 करोड़ की भारी रिकवरी
मामला दर्ज होने और प्रशासनिक दबाव बढ़ने के बाद संबंधित एजेंसी ने मिलर के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। इसके परिणामस्वरूप गायब मिले 1,005 मीट्रिक टन धान की एवज में मिलर से 2 करोड़ 47 लाख रुपये की पूरी रिकवरी कर ली गई है।इसके साथ ही मिल के पास लंबित बचा हुआ 2,767 मीट्रिक टन चावल भी सफलतापूर्वक सरकार के खाते में जमा करवा लिया गया है।
SIT जांच में फर्जी खरीद और बड़ी मिलीभगत का खुलासा
मामले की गहराई से जांच कर रही एसआईटी (SIT) के अधिकारियों के अनुसार, यह केवल स्टॉक कम होने का साधारण मामला नहीं है। शुरुआती तफ्तीश और दस्तावेजी जांच में फर्जी खरीद (कागजी खरीद) और विभागीय अधिकारियों व मिलर्स के बीच आपसी मिलीभगत की गंभीर आशंका सामने आई है।
एसआईटी का बयान
सरकारी अनाज और राजस्व को चूना लगाने वाले इस नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। फर्जीवाड़े और मिलीभगत के पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही मिलर नसीब सिंह को गिरफ्तार किया गया है। इस घोटाले में शामिल अन्य चेहरों को भी बख्शा नहीं जाएगा।