चंडीगढ़ : सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने त्योहारों के सीजन में बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दीपावली सहित विभिन्न त्योहारों के अवसर पर आम आदमी को राहत मिलने के बजाय घरेलू बजट की चिंता सता रही है। खाद्य पदार्थों, घरेलू जरूरतों, शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ते खर्च ने मध्यम वर्ग, गरीब परिवारों, किसानों तथा छोटे व्यापारियों की आर्थिक परेशानियां बढ़ा दी हैं। महंगाई और बेरोजगारी की दोहरी मार ने आम परिवारों की त्योहारों की खुशियां फीकी कर दी हैं।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस की नीति हमेशा आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ाने, रोजगार के अवसर पैदा करने और आवश्यक वस्तुओं को किफायती बनाने की रही है। महंगाई का आकलन केवल सरकारी आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि एक परिवार अपनी सीमित आय में कितनी जरूरतें पूरी कर पा रहा है।
सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार के अपने आंकड़े महंगाई की गंभीर स्थिति उजागर कर रहे हैं। सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत थी। खाद्य महंगाई 5.97 प्रतिशत से बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई 6.08 प्रतिशत दर्ज की गई। प्याज की कीमतों में सालाना 108.09 प्रतिशत, अदरक में 62.85 प्रतिशत और लहसुन में 54.62 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
कुमारी सैलजा ने सवाल उठाया कि जब खाने-पीने की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ रही हैं, तो गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार त्योहार कैसे मनाएंगे? क्या सरकार के पास महंगाई रोकने की कोई ठोस कार्ययोजना है? उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को केवल महंगाई के आंकड़ों की व्याख्या करने के बजाय जनता की वास्तविक परेशानियों का समाधान करना चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि केंद्र सरकार जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाए, आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करे तथा गरीब एवं मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए ठोस आर्थिक कदम उठाए।
सांसद ने कहा कि त्योहारों की वास्तविक खुशी तभी होगी, जब हर परिवार सम्मानपूर्वक अपनी जरूरतें पूरी कर सके और किसी गरीब को त्योहार मनाने के लिए अपनी आवश्यकताओं से समझौता न करना पड़े।