स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा को उम्मीद है कि पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीतने के बाद वह जल्द ही भारत में अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खिलाडिय़ों के साथ कंपीट करते दिखेंगे। नीरज ने पेरिस में 89.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता। नीरज ने ‘ओलंपिक.कॉम’ द्वारा प्रशंसकों के साथ एक बातचीत सत्र के दौरान कहा, भारत में अन्य अंतरराष्ट्रीय सितारों के साथ प्रतिस्पर्धा करना मेरा सपना है। उम्मीद है कि भारत में जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता होगी और मैं ऐसा कर पाऊंगा। नीरज ने कहा कि वह अपने खेल के कुछ क्षेत्रों पर काम करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, मैं अब एक नए सत्र में प्रवेश कर रहा हूं, इसलिए मेरे पास ट्रेनिंग विधियों या तकनीक को बदलने के लिए इतना समय नहीं है। लेकिन मुझे कुछ एरिया में सुधार करने की उम्मीद है, खासकर भाला फेंकने की लाइन में। नीरज ने कहा, ‘भाला फेंकने का सही कोण, ताकि मुझे अपने थ्रो में अधिक शक्ति मिले। मैं निश्चित रूप से इस पर काम करूंगा।’ नीरज ने कहा कि उनकी मां हमेशा अपने दिल से बात करती हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरी मां…वह अपनी शादी से पहले और बाद में हमेशा एक गांव में रहीं। वह सोशल मीडिया और इस तरह की चीजों से परिचित नहीं हैं। वह अकसर अपने दिल से बात करती हैं।
ओलंपिक में कोच को पड़ा दिल का दौरा, भारतीय डाक्टर ने बचाई जान
पेरिस। उज्बेकिस्तान के मुख्य मुक्केबाजी कोच तुलकिन किलिचेव को पेरिस ओलंपिक में अपनी टीम के पहले स्वर्ण पदक का जश्न मनाने के बाद ब्रिटेन के ट्रेनिंग स्टाफ के दो सदस्यों ने दिल का दौरा पडऩे से बचाया। देश के मुक्केबाजों ने इसकी पुष्टि की। ग्रेट ब्रिटेन मुक्केबाजी के अनुसार टीम के भारतीय मूल के डाक्टर हरज सिंह और फिजियोथेरेपिस्ट रॉबी लिलीस ने किलिचेव को जानलेवा संकट में पाया। उन्होंने कोच को सीपीआर दिया और लिलीस ने डिफाइब्रिलेटर (हृदय गति सामान्य करने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीन) का भी इस्तेमाल किया।