Saturday, October 03, 2026
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बाज़ार

कैबिनेट ने एनआईआईएफ में 30,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश को दी मंजूरी, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

30 जून, 2026 12:20 PM

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने देश में बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास को गति देने और निजी व संस्थागत निवेश को बढ़ावा देने के लिए सोमवार को एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) में 30,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद एनआईआईएफ में भारत सरकार की कुल निवेश प्रतिबद्धता बढ़कर 60,000 करोड़ रुपए हो गई है।
एक आधिकारिक बयान में सोमवार को कहा गया कि यह अतिरिक्त निवेश परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी अवसंरचना, ई-मोबिलिटी और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में निवेश को तेज करेगा, जिससे देश में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।


नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) भारत सरकार द्वारा समर्थित एक संप्रभु निवेश फंड है, जिसका संचालन और प्रबंधन नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (एनआईआईएफएल) करता है। सरकार की इसमें 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वर्तमान में एनआईआईएफ अपने विभिन्न फंडों और निवेश रणनीतियों के जरिए करीब 40,000 करोड़ रुपए की पूंजी का प्रबंधन कर रहा है।
एनआईआईएफ ने अब तक निवेशकों को बड़े निवेशों से सफल निकासी (एग्जिट) के जरिए लगभग 12,000 करोड़ रुपए का रिटर्न भी दिया है, जिससे इसकी मजबूत निवेश क्षमता और प्रदर्शन का पता चलता है।
एनआईआईएफ में दुनिया के कई प्रतिष्ठित संस्थागत निवेशकों ने निवेश किया है, जिनमें अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, ऑस्ट्रेलियनसुपर, सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स, ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान, टेमासेक, एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी), एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी), न्यू डेवलपमेंट बैंक, जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी), यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (डीएफसी) के अलावा एक्सिस बैंक, एचडीएफसी समूह, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस और भारतीय स्टेट बैंक जैसे प्रमुख भारतीय संस्थान शामिल हैं।


ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे देशों के निवेशकों की भागीदारी भारत की विकास क्षमता और एनआईआईएफ की विश्वसनीयता को दर्शाती है।
बयान के अनुसार, एनआईआईएफ वर्तमान में चार प्रमुख निवेश रणनीतियों के तहत काम कर रहा है, जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राइवेट मार्केट्स, ग्रोथ इक्विटी और भारत-जापान बिजनेस कॉरिडोर के तहत क्लाइमेट निवेश शामिल हैं।
सरकार द्वारा मंजूर किए गए 30,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश का उपयोग एनआईआईएफ के दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर फोकस्ड फंड की स्थापना के लिए किया जाएगा। यह फंड पहले फ्लैगशिप इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का उत्तराधिकारी होगा और इसका लक्ष्य करीब 30,000 करोड़ रुपए का कोष तैयार करना है।


इस नए फंड के जरिए परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ शहरी अवसंरचना और ई-मोबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा। साथ ही यह राशि एनआईआईएफ की नई निवेश रणनीतियों और भविष्य के द्विपक्षीय तथा रणनीतिक फंडों को भी समर्थन देगी।

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