ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार ने ऑनलाइन नुकसान से लोगों को बचाने के लिए ‘Digital Duty of Care’ कानून का मसौदा संसद में पेश किया है। प्रस्तावित कानून के तहत सोशल मीडिया, जनरेटिव AI, मैसेजिंग ऐप, वेबसाइट और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म जैसी डिजिटल सेवाएं देने वाली कंपनियों को अपने यूजर्स की सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी उठानी होगी।
यह कानून पहली बार 2024 में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन उस समय इसे रोक दिया गया था। सरकार ने इसे ऑनलाइन नुकसान होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय शुरुआत से ही ऐसे नुकसान को रोकने वाली व्यवस्था की दिशा में बदलाव बताया था।
यूजर्स को एल्गोरिदम चुनने का विकल्प
प्रस्तावित कानून के तहत Facebook, Instagram और TikTok जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स को यह विकल्प देना होगा कि उनकी डिफॉल्ट फीड में एल्गोरिदम द्वारा सुझाई गई व्यक्तिगत सामग्री दिखाई जाए या केवल उन्हीं लोगों की पोस्ट दिखाई जाए, जिन्हें वे फॉलो करते हैं।
सोशल मीडिया इस्तेमाल करते समय यूजर्स को पॉप-अप के जरिए यह विकल्प दिया जाएगा।
संचार मंत्री अनिका वेल्स ने कहा कि कई लोग संभवतः पहले की तरह एल्गोरिदम की सिफारिशों वाली फीड ही चुनेंगे, लेकिन इस पहल का महत्व यह है कि यूजर्स को खुद फैसला करने का अधिकार मिलेगा।
गैरकानूनी और हानिकारक कंटेंट से सुरक्षा जरूरी
मसौदा कानून के तहत डिजिटल सेवा प्रदाताओं को सभी यूजर्स को गंभीर रूप से हानिकारक और गैरकानूनी सामग्री से बचाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
इसमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री, बच्चों को यौन गतिविधियों के लिए फंसाना (grooming), यौन हिंसा को बढ़ावा देना या उसके लिए उकसाना, आतंकवाद का समर्थन, अपराध को बढ़ावा देना, अवैध ड्रग्स के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना और बेहद हिंसक व्यवहार को बढ़ावा देने वाली सामग्री शामिल है।
बच्चों और किशोरों को विशेष रूप से ऐसे कंटेंट और फीचर्स से बचाने की व्यवस्था होगी, जो उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का आदी बना सकते हैं। इसमें पोर्नोग्राफी, खाने से जुड़ी अस्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने वाली सामग्री, महिलाओं और लैंगिक समानता के प्रति शत्रुतापूर्ण सोच, खतरनाक स्टंट तथा उत्पीड़न या साइबरबुलिंग जैसी चीजें शामिल हैं।
कंपनियों को नियमित जोखिम आकलन करना होगा
डिजिटल कंपनियों को नियमित रूप से Risk Assessment करना होगा। इसमें ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े सभी संभावित और उचित रूप से अनुमानित जोखिमों के साथ-साथ उन कंटेंट और डिजाइन फीचर्स की पहचान करनी होगी, जिनसे ये जोखिम पैदा हो सकते हैं।
यदि eSafety Commissioner मांग करता है तो कंपनियों को 30 दिनों के भीतर ये आकलन उपलब्ध कराने होंगे।
मसौदा कानून eSafety Commissioner को ‘Nudify’ ऐप्स और वेबसाइटों के खिलाफ कंटेंट हटाने के नोटिस जारी करने का अधिकार भी देगा। इसके अलावा बच्चों से जुड़े साइबरबुलिंग और वयस्कों से जुड़े साइबर दुर्व्यवहार से निपटने वाली व्यवस्थाओं को आसान बनाने का भी प्रस्ताव है।
UK और EU के कानूनों से मिलता-जुलता मॉडल
ऑस्ट्रेलिया का प्रस्तावित कानून ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में पहले से लागू कुछ नियमों के समान है।
EU में 2024 से Digital Services Act (DSA) के तहत Meta जैसे प्लेटफॉर्म के संभावित रूप से लत लगाने वाले फीचर्स की जांच की जा रही है। हाल ही में EU के सांसदों ने Meta से यूरोप में उसके प्लेटफॉर्म के ‘addictive’ डिजाइन में बदलाव करने की मांग भी की है।
कानून की शुरुआत कैसे हुई?
Digital Duty of Care का विचार 2024 में Online Safety Act की समीक्षा के दौरान सामने आया था। सरकार ने सोशल मीडिया पर उम्र संबंधी पाबंदियों को लागू करने पर ध्यान देने के लिए इस कानून को कुछ समय के लिए रोक दिया था।
दिसंबर 2025 में इस प्रस्ताव को दोबारा आगे बढ़ाया गया और इस पर सार्वजनिक सुझाव मांगे गए। इसके बाद मई 2026 में सरकार ने Duty of Care Framework तैयार करने से जुड़ा एक Issues Paper जारी किया।
नियम तोड़ने पर करीब 11 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना
प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर करीब 11 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
eSafety Commissioner को टेक कंपनियों द्वारा नियमों के पालन की जांच करने का अधिकार दिया जाएगा।
मसौदा कानून में ऑनलाइन सुरक्षा पर शोध करने वाले ‘Approved Researchers’ के लिए भी प्रावधान है। ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के योग्य शोधकर्ताओं को ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े शोध के लिए डिजिटल कंपनियों के डेटा तक पहुंच मिल सकती है।
ऐसे शोधकर्ताओं को डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा जांचने के लिए ‘Sock Puppet’ यानी नकली ऑनलाइन पहचान बनाने की भी अनुमति दी जा सकती है।