ईरान ने मंगलवार को अमेरिका को ‘आर्थिक युद्ध’ की नई चेतावनी दी। ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई का जवाब फारस की खाड़ी में एक समुद्री प्रतिबंध क्षेत्र बनाकर दिया जा सकता है। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने अमेरिकी युद्धपोतों के खिलाफ एक उन्नत मिसाइल का इस्तेमाल किया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच छह महीने से जारी युद्ध में एक बार फिर तनाव बढ़ रहा है। हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच हमले हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है।
सऊदी अरब के कई शहरों पर हूती हमला, 73 लोग घायल
ईरान समर्थित हूती मिलिशिया ने मंगलवार को सऊदी अरब के कई शहरों पर हमला किया। यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता के अनुसार, इन हमलों में 73 लोग घायल हुए हैं।
इस हमले को क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने का संकेत माना जा रहा है। वहीं, कूटनीतिक प्रयासों में प्रगति नहीं होने के कारण व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका भी बढ़ रही है।
ईरान बनाएगा ‘Maritime Exclusion Zone’
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा कि ईरान आने वाले दिनों में फारस की खाड़ी में एक नया प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र उस जगह से शुरू होगा जहां से अमेरिका की ईरान नाकाबंदी शुरू होती है और खाड़ी के कुछ हिस्सों तक फैलेगा। इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले किसी भी जहाज को ईरान की प्रतिबंध सूची में डाले जाने की बात कही गई है।
रेजाई ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेरिका को ईरान की नई मिसाइलों से स्पष्ट चेतावनी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक युद्ध का जवाब फारस की खाड़ी में समुद्री प्रतिबंध क्षेत्र बनाकर दिया जाएगा और अमेरिकी युद्धपोतों तथा सैन्य ठिकानों को लेकर ईरान की रणनीति में बड़ा बदलाव किया गया है।
ईरान ने Qassem Basir मिसाइल के इस्तेमाल का दावा किया
ईरानी मीडिया के अनुसार, रेजाई का संकेत Qassem Basir बैलिस्टिक मिसाइल की ओर था। रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस मिसाइल का इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी युद्धपोतों के खिलाफ किया गया।
हालांकि, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसके युद्धपोतों ने किसी भी मिसाइल हमले से खुद को बचा लिया।
ईरान ने Qassem Basir को एक उन्नत मिसाइल बताया है, जिसमें बेहतर दिशा-नियंत्रण और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बच निकलने की क्षमता होने का दावा किया गया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इसका पहला युद्धक इस्तेमाल जून 2025 में इजरायल के खिलाफ हुआ था।
होर्मुज में शिपिंग पर दबाव
अमेरिकी हमलों से ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचने और उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने के बावजूद ईरान के पास मिसाइल और ड्रोन क्षमता बनी हुई है।
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों को खतरा पैदा करने और उन खाड़ी देशों पर हमले करने की क्षमता रखता है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का कच्चा तेल और LNG कारोबार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता था। इसी वजह से यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रंप बोले- युद्ध जीतने के बाद तेल की कीमतें गिरेंगी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीतने के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि युद्ध जीतने के बाद तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी और पेट्रोल की कीमत 3 डॉलर प्रति गैलन और अंततः 2 डॉलर से भी कम हो सकती है।
हालांकि, ट्रंप द्वारा फरवरी में ‘Operation Epic Fury’ शुरू करते समय तय किए गए सभी लक्ष्य अभी हासिल नहीं हुए हैं। इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना, उसके पड़ोसी देशों पर हमले की क्षमता रोकना और ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए परिस्थितियां बनाना शामिल था।
ईरान के नेतृत्व के सत्ता में बने रहने से तनाव जारी
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का मौजूदा धार्मिक नेतृत्व अभी भी सत्ता में बना हुआ है और वह युद्ध के बाद पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में उभरने की कोशिश कर रहा है।
तेहरान लगातार प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। साथ ही ईरान को उम्मीद है कि भविष्य में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार भी उसे मिल सकता है।