भिवानी : भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने रविवार, 05 अप्रैल 2026 को भिवानी में आयोजित एक विशाल किसान सभा को संबोधित करते हुए ट्रैक्टरों के संचालन पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। टिकैत ने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियम किसानों को खेती छोड़ने पर मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन नियमों में ढील नहीं दी गई, तो देश का अन्नदाता एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
विवाद की जड़: "NGT के सख्त कायदे"
एनसीआर (NCR) और अन्य क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर जो नियम लागू किए गए हैं, वे किसानों के लिए 'फांस' बन रहे हैं:
आयु सीमा का संकट: नियमों के अनुसार, एनसीआर क्षेत्र में 10 साल से पुराने और अन्य जगहों पर 15 साल से पुराने ट्रैक्टरों का इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
जेल की सजा: टिकैत ने खुलासा किया कि यदि कोई पुराना ट्रैक्टर तीसरी बार पकड़ा जाता है, तो उसके ड्राइवर को सीधे जेल भेजने का प्रावधान है। यह उन गरीब ड्राइवरों के लिए घातक है जो किराए पर ट्रैक्टर चलाकर अपना पेट पालते हैं।
राकेश टिकैत की खरी-खरी: "ट्रैक्टर नहीं, किसान का जीवन है"
सभा को संबोधित करते हुए टिकैत ने सरकार से तीखे सवाल पूछे:
छोटे किसानों का क्या? उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे हर 10 साल में नया ट्रैक्टर खरीद सकें। अधिकतर ट्रैक्टर पुराने हैं और उनके दस्तावेज भी अधूरे हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव: सरकार ने पुराने ट्रैक्टरों को बैन तो कर दिया, लेकिन किसानों को नई मशीनरी खरीदने के लिए न तो पर्याप्त सब्सिडी दी और न ही कोई राहत।
कमर तोड़ नियम: टिकैत के अनुसार, हरियाणा और पंजाब का किसान पहले ही कर्ज और आर्थिक संकट में डूबा है, ऐसे में इन नियमों को थोपना उनकी कमर तोड़ने जैसा है।
किसानों की व्यथा: "किराए पर चलने वालों पर सबसे ज्यादा मार"
ट्रैक्टर नियमों का सबसे बुरा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो किराए पर जुताई या ढुलाई का काम करते हैं। पुलिस और परिवहन विभाग की सख्ती के कारण अब वे सड़क पर निकलने से डर रहे हैं। टिकैत ने कहा कि ट्रैक्टर केवल एक वाहन नहीं, बल्कि किसान का मुख्य 'हथियार' है, और उसे छीनना खेती को खत्म करने की साजिश है।
भविष्य की रणनीति
भिवानी की इस सभा के माध्यम से राकेश टिकैत ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ट्रैक्टर नियमों को लेकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जा सकता है। उन्होंने हरियाणा के किसानों से एकजुट होने की अपील की है ताकि सरकार को इन 'अन्यायपूर्ण' नियमों को वापस लेने या उनमें संशोधन करने के लिए मजबूर किया जा सके।