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बाज़ार

सेंसेक्स की शुरुआत से अब तक लगातार शामिल रहीं ये चार कंपनियां

05 जनवरी, 2026 12:34 PM

नई दिल्ली। बीएसई के सबसे प्रमुख सूचकांक और देश की अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर कहे जाने वाले सेंसेक्स के 40 साल के इतिहास में महज चार कंपनियां ही ऐसी हैं जो शुरू से अब तक लगातार इसका हिस्सा रही हैं। सेंसेक्स में कुल 30 कंपनियां होती हैं। ये बड़ी बाजार पूंजी वाली दिग्गज कंपनियां हैं जिनमें थोड़ा भी उतार-चढ़ाव पूरे बाजार की धारणा को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। दरअसल, ‘सेंसेक्स’ शब्द अंग्रेजी के दो शब्दों ‘सेंसिटिव’ और ‘इंडेक्स’ के मेल से बना है जिसका मतलब होता है संवेदी सूचकांक।

सेंसेक्स में कभी-कभी कुछ पुरानी कंपनियों की जगह नयी कंपनियों को भी ले लेती हैं। इस साल दो जनवरी को 40 साल पूरे करने वाले सेंसेक्स में चार कंपनियां ही ऐसी हैं जो इसकी शुरुआत से अब तक सूचकांक का हिस्सा रही हैं। ये कंपनियां हैं – हिंदुस्तान यूनीलिवर, लार्सन एंड टूब्रो, आईटीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज। पहले सेंसेक्स में कौन सी कंपनी शामिल होगी यह उनके कुल बाजार पूंजीकरण पर निर्भर करता था। यह क्रम अगस्त 2003 तक चलता रहा। 

सितंबर 2003 से यह कंपनी के मुक्त (फ्री-फ्लोट) बाजार पूंजीकरण के आधार पर तय किया जाने लगा। मुक्त बाजार पूंजीकरण की गणना में सिर्फ उन्हीं शेयरों को शामिल किया जाता है जो बाजार में कारोबार के लिए उपलब्ध हैं। इसमें प्रवर्तकों और इनसाइडरों के शेयरों तथा प्रतिबंधित शेयरों को शामिल नहीं किया जाता है।

जब दो जनवरी 1986 को सेंसेक्स की शुरुआत हुई थी उस समय इसमें एसीसी, एशियन केबल्स, बल्लारपुर इंडस्ट्रीज, बॉम्बे बुमराह, बॉम्बे डाइंग, सिएट टायर्स, सेंचुरी एसपीजी., क्रॉम्पटन ग्रीव्स, ग्लेक्सो स्मिथक्लाइन फार्माशूटिकल्स, ग्रासिम, गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स, हिंडाल्को, हिंदुस्तान मोटर्स, इंडियन होटल्स, इंडियन ऑर्गेनिक केमिकल्स (अब फ्यूचुरा पॉलिस्टर्स), इंडियन रेयॉन एंड इंडस्ट्रीज (अब आदित्य बिरला नुवो), आईटीसी लिमिटेड, किर्लोस्कर कमिन्स (अब कमिन्स इंडिया लिमिटेड), एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मुकंद आयरन (अब मुकंद लिमिटेड), नेस्ले, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सिंधिया, सिमेंस, टाटा इंजीनियरिंग (अब टाटा मोटर्स), टाटा पावर, टाटा स्टील और जेनिथ शामिल थीं।

सेंसेक्स की कंपनियों में 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार सबसे अधिक 15.18 प्रतिशत भारांश एचडीएफसी बैंक का है। आईसीआईसीआई बैंक 10.13 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज 9.72 प्रतिशत के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। सेंसेक्स में इंफोसिस और भारती एयरटेल का भारांश भी पांच प्रतिशत से अधिक है। शीर्ष 10 कंपनियों का कुल भारांश 65 प्रतिशत है। अपने 40 साल के सफर में सेंसेक्स ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। बीएसई द्वारा जारी श्वेत पत्र के अनुसार, सेंसेक्स के लिए पांच सबसे अच्छे साल 1988,1991, 1999, 2003 और 2009 रहे हैं। वहीं, पांच सबसे बुरे साल 1995, 1998, 2000, 2008 और 2011 रहे हैं।

सेंसेक्स की शुरुआत दो जनवरी 1986 को 549.43 अंक से हुई। यह 1990 में पहली बार 1,000 अंक पर पहुंचा। साल 1999 में यह पांच हजार और 2006 में 10 हजार अंक को छूने में कामयाब रहा। अगले साल 2007 में यह 20 हजार अंक को पार कर गया। इसने साल 2015 में 30 हजार, 2019 में 40 हजार, 2021 में 50 हजार, 2022 में 60 हजार और 2023 में 70 हजार अंक को छुआ। साल 2024 में यह पहली बार 85 हजार के पार पहुंच गया। सेंसेक्स के लिए सबसे अच्छा दिन 18 मई 2009 रहा जब सूचकाकं 17.34 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुआ था। वहीं, सबसे खराब दिन 23 मार्च 2020 रहा जब कोविड-19 के समय लॉकडाउन के बाद यह 13.15 प्रतिशत उतर गया था।

उल्लेखनीय है कि सेंसेक्स दो जनवरी 2026 को 85,762.01 अंक पर बंद हुआ जो इसका अबतक का दूसरा सबसे ऊंचा बंद भाव है। यह 26 सितंबर 2024 को 85,836.12 अंक पर बंद हुआ था। हालांकि बीच कारोबार में यह 86 हजार के पार भी गया है।

 

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