सितंबर भारत की विदेश नीति और कूटनीति के लिहाज से बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण महीना रहने वाला है। 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी के साथ महीने के प्रमुख कूटनीतिक कार्यक्रमों का आगाज हो चुका है। आने वाले हफ्तों में प्रधानमंत्री की बहुपक्षीय बैठकों में भागीदारी, भारत में होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की प्रस्तावित विदेश यात्राओं के चलते वैश्विक मंच पर भारत की सक्रियता बढ़ने वाली है। ऐसे में सितंबर में दुनिया की नजर भारत की कूटनीतिक गतिविधियों और उसकी विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर रहेगी।
एससीओ में भारत की रणनीतिक प्राथमिकताएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, कनेक्टिविटी, व्यापार और सदस्य देशों के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा प्रमुखता से होने की उम्मीद है। एससीओ के मंच पर भारत अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय हितों को मजबूती से रखने की कोशिश करेगा। मध्य एशिया और व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री का भारत दौरा
सितंबर के शुरुआती दिनों में बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर का भारत दौरा भी कूटनीतिक कैलेंडर का महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा। वह 2 से 4 सितंबर 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस यात्रा के दौरान भारत और यूरोप के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। यूरोपीय देशों के साथ भारत के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के बीच बेल्जियम के प्रधानमंत्री की यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर दुनिया की नजर
सितंबर का सबसे बड़ा कूटनीतिक आयोजन भारत में होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होगा। यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित होगा। इसमें 20 से अधिक देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। वैश्विक व्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच ब्रिक्स भारत के लिए ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से उठाने का महत्वपूर्ण मंच होगा। भारत इस सम्मेलन के जरिए विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों को वैश्विक विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश कर सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, विकास, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। बदलते वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत की कोशिश अपनी प्राथमिकताओं के साथ विकासशील देशों के हितों को भी मजबूती से सामने रखने की होगी। भारत ब्रिक्स के मंच का इस्तेमाल आर्थिक सहयोग बढ़ाने, वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर देने और ग्लोबल साउथ की भूमिका को मजबूत करने के लिए कर सकता है।
यूएनजीए में जयशंकर की अहम भूमिका
विदेश मंत्री एस. जयशंकर सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के लिए अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं। न्यूयॉर्क में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान भारत की दुनिया के प्रमुख देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण मुलाकातें होने की संभावना है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, ग्लोबल साउथ, संयुक्त राष्ट्र सुधार और वैश्विक आर्थिक मुद्दे भारत के प्रमुख एजेंडे में रह सकते हैं। इन मुद्दों पर भारत अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति के अनुरूप पक्ष रख सकता है।
पोलैंड दौरे से यूरोप को साधने की कोशिश
जयशंकर की पोलैंड यात्रा भी प्रस्तावित है। यह दौरा यूरोप के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव को रेखांकित कर सकता है। मध्य और पूर्वी यूरोप में भारत की रणनीतिक और आर्थिक पहुंच बढ़ाने के लिहाज से पोलैंड एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रहा है। भारत यूरोपीय देशों के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है। ऐसे में जयशंकर की संभावित पोलैंड यात्रा इस व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा सकती है।
सितंबर में कूटनीतिक सक्रियता का व्यापक असर
एससीओ, ब्रिक्स और संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रमुख बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी सितंबर को विदेश नीति के लिहाज से खास बनाती है। इसके साथ यूरोपीय देशों के नेताओं की भारत यात्राएं और विदेश मंत्री की प्रस्तावित यात्राएं द्विपक्षीय संबंधों को भी गति दे सकती हैं। वैश्विक स्तर पर युद्ध, व्यापारिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और बदलते शक्ति संतुलन के बीच भारत सितंबर में बहुपक्षीय कूटनीति के जरिए अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने की कोशिश करेगा।