सड़क पर चलते समय ट्रैफिक नियमों की अनदेखी अक्सर भारी पड़ती है लेकिन एक गलती ऐसी है जो न केवल आपकी जेब खाली कर सकती है बल्कि आपको सलाखों के पीछे भी पहुंचा सकती है। वह है इमरजेंसी वाहन (एम्बुलेंस) को रास्ता न देना। सरकार ने जीवन रक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस संबंध में बेहद सख्त कानून बनाए हैं।
इंसानियत भी और कानूनी जिम्मेदारी भी
एम्बुलेंस एक इमरजेंसी वाहन है जिसमें हर सेकंड की कीमत किसी की जिंदगी हो सकती है। जैसे ही सड़क पर एम्बुलेंस का सायरन सुनाई दे यह हर चालक का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है कि वह तुरंत अपनी गाड़ी साइड में करके रास्ता खाली करे।
कितना लगेगा जुर्माना?
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 194E के तहत एम्बुलेंस का रास्ता रोकना एक गंभीर अपराध माना गया है। यदि आप जानबूझकर या लापरवाही में एम्बुलेंस को जगह नहीं देते हैं तो पहली बार नियम तोड़ने पर ही 10,000 रुपये तक का चालान काटा जा सकता है। जुर्माने के साथ-साथ दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की जेल भी हो सकती है। यदि आप बार-बार ऐसा करते पकड़े जाते हैं तो हर बार भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
मरीज की जान बचाना है प्राथमिकता
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार अक्सर लोग ट्रैफिक जाम का बहाना बनाते हैं लेकिन कानून स्पष्ट है कि इमरजेंसी सायरन बजते ही अन्य वाहनों को अपनी गति धीमी कर एम्बुलेंस को 'राइट ऑफ वे' (निकलने का पहला अधिकार) देना होगा। आपकी एक छोटी सी समझदारी किसी परिवार का चिराग बुझने से बचा सकती है।