शिमला: बढ़ते पर्यटन के बीच शिमला में कचरा प्रबंधन शहर के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। गर्मियों के पर्यटन सीजन में माल रोड और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, शिमला में प्रतिदिन करीब 108 टन कचरा निकलता है, जिसमें लगभग 59 टन गीला और 43 टन सूखा कचरा शामिल है। शहर में अभी इंजीनियर्ड सैनिटरी लैंडफिल की सुविधा नहीं है। वहीं, सूखे कचरे के पुनर्चक्रण में रैगपिकर्स और अनौपचारिक कचरा संग्रहकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मई में एसईएचबी सोसायटी के 900 से अधिक सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान घर-घर कचरा संग्रहण प्रभावित हुआ था, जिससे शहर के कई हिस्सों में कचरा जमा हो गया। इसके बाद नगर निगम ने कचरा संग्रहण के लिए आउटसोर्सिंग टेंडर आमंत्रित किए।
पर्यटन सीजन में बढ़ने वाले कचरे के मद्देनजर नगर निगम पर्यटकों पर ग्रीन टैक्स लगाने का प्रस्ताव भी सरकार को भेज चुका है। वहीं, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत अधिक फुटफॉल वाले पर्यटन स्थलों पर कचरा शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है।
नगर निगम ने पर्यटक वाहनों से निकलने वाले कचरे के लिए टुटीकंडी में संग्रहण केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा है।
पर्यावरणविद् प्रदीप सांगवान के अनुसार, हिमालयी पर्यटन स्थलों के लिए ऐसी दीर्घकालिक नीति जरूरी है, जिसमें पर्यटकों की संख्या के साथ उनके कारण पैदा होने वाले पर्यावरणीय दबाव को भी ध्यान में रखा जाए। पर्याप्त फंडिंग, बेहतर सफाई व्यवस्था, कर्मचारियों के लिए उचित कार्य परिस्थितियां और पर्यावरण-अनुकूल कचरा निपटान प्रणाली शिमला की बढ़ती जरूरत बन गई है।
बढ़ता पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ बढ़ रहे कचरे का वैज्ञानिक और स्थायी प्रबंधन सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।