करनाल : शहर के एक निजी अस्पताल से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ इलाज का 1.50 लाख रुपए का बिल न चुका पाने के कारण अस्पताल प्रबंधन ने एक मासूम बच्चे का शव परिजनों को सौंपने से साफ इनकार कर दिया। इस बात को लेकर अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
खेलते-खेलते हुआ था हादसा
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले रघुनाथ और उनकी पत्नी रामदेवी पानीपत की एक दरी फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। उन्होंने रुआंसे गले से बताया कि उनका बेटा फैक्ट्री में खेल रहा था, तभी अचानक एक भारी लोहे का गाटर उसके ऊपर गिर गया। बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत पानीपत से करनाल के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया।
12 घंटे में बना दिया 1.50 लाख का बिल
परिजनों के अनुसार, बच्चे को शुक्रवार रात करीब 9 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद शनिवार सुबह 9 बजे उसकी मौत हो गई। महज 12 घंटे के इस इलाज का अस्पताल प्रबंधन ने 1.50 लाख रुपए का भारी-भरकम बिल बना दिया।
परिजनों का आरोप: "जब हमने पैसे न होने की बात कही और शव मांगा, तो अस्पताल प्रशासन ने दोटूक कह दिया कि जब तक पूरा बिल क्लियर नहीं होगा, तब तक शव नहीं मिलेगा।" लाचार माता-पिता ने अपनी फैक्ट्री के संचालक श्रवण से भी मदद मांगी, लेकिन उन्होंने भी इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करने में असमर्थता जताई।
हंगामे के बाद जागी पुलिस, तब मिला शव
गरीब माता-पिता से शव के बदले पैसों की मांग की बात जैसे ही बाहर फैली, अस्पताल में लोगों का विरोध और गुस्सा बढ़ने लगा। माहौल बिगड़ता देख तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन से सख्त लहजे में बातचीत की और मामले को शांत कराया। पुलिस के दबाव के बाद आखिरकार अस्पताल प्रबंधन पीछे हटा और बिना भुगतान के ही बच्चे का शव परिजनों को सौंपा गया।