नई दिल्ली : वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का एमएसएमई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत बना हुआ है, लेकिन इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए समय पर नीतिगत समर्थन और स्थिर वैश्विक माहौल जरूरी होगा। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पीएचडीसीसीआई ने अपने एसएमई मार्केट सेंटिमेंट इंडेक्स (एसएमईएसआई) का चौथा संस्करण जारी किया है, जिसमें जनवरी से मार्च 2026 के दौरान एमएसएमई सेक्टर के प्रदर्शन और अगले तिमाही के आउटलुक को शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रोथ बरकरार है, लेकिन बदलते वैश्विक हालात के कारण इसकी रफ्तार में थोड़ी कमी आई है।
सर्वेक्षण के मुताबिक, एसएमई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स (एसएमई-बीएआई) मार्च तिमाही में 56.5 रहा, जो पिछले तिमाही के 58.9 से थोड़ा कम है, लेकिन अभी भी यह विस्तार का संकेत देता है।
इसी तरह, अप्रैल से जून 2026 के लिए एसएमई बिजनेस आउटलुक इंडेक्स (एमएमई-बीओआई) 58.7 रहा, जो पहले के 60.7 के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी सकारात्मक संकेत देता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कारोबार में बढ़ोतरी का मुख्य कारण नए ऑर्डर और उत्पादन में स्थिरता है। करीब 37 फीसदी कंपनियों ने नए ऑर्डर बढ़ने की बात कही, जिससे उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई।
वहीं, रोजगार और सप्लाई चेन (डिलीवरी टाइम) में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनियां सावधानी के साथ संतुलित रणनीति अपना रही हैं।
आने वाली तिमाही (अप्रैल-जून) को लेकर भी कंपनियां आशावादी हैं। करीब 37 फीसदी कंपनियों को उम्मीद है कि उनका कारोबार और बढ़ेगा, जबकि लगभग आधी कंपनियों का मानना है कि हालात स्थिर रहेंगे।
निवेश के मोर्चे पर भी सकारात्मक रुख दिख रहा है। करीब 47 फीसदी कंपनियां पूंजी निवेश (कैपेक्स) बढ़ाने की योजना बना रही हैं, जिसका कारण भविष्य की मांग को लेकर उम्मीदें हैं।
हालांकि, नौकरी देने के मामले में कंपनियां अभी भी सतर्क हैं और धीरे-धीरे भर्ती बढ़ा रही हैं। यह दिखाता है कि कंपनियां अनिश्चित वैश्विक हालात के बीच लागत और संचालन को संतुलित रखने की कोशिश कर रही हैं।