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पंजाब

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा मेथनॉल को विनियमित करने और जहरीली शराब की त्रासदियों को रोकने के लिए तत्काल केंद्रीय कानून बनाने की मांग

17 जून, 2026 06:41 PM

चंडीगढ़ : पंजाब के वित्त एवं आबकारी तथा कर मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से मिथाइल अल्कोहल (मेथनॉल) को विनियमित और निगरानी करने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने बहुमूल्य मानव जीवन बचाने और भविष्य में जहरीली शराब की त्रासदियों को रोकने के लिए एक विशेष केंद्रीय कानून बनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। वित्त मंत्री ने आज यहां आबकारी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डी.के. तिवारी और आबकारी एवं कर आयुक्त जितेंद्र जोरवाल के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये विचार व्यक्त किए।

मेथनॉल के परिवहन और प्रशासनिक कठिनाइयों के बारे में विस्तार से बताते हुए, आबकारी मंत्री चीमा ने कहा कि भारत में उपयोग होने वाला लगभग 90 प्रतिशत मेथनॉल विदेशों से आयात किया जाता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न बंदरगाहों और सीमा शुल्क बिंदुओं के माध्यम से देश में प्रवेश करने के बाद, यह खतरनाक रसायन अपने निर्धारित औद्योगिक उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले कई राज्यों की सीमाओं को पार करता है। आबकारी मंत्री ने आगे कहा, "चूंकि मेथनॉल अपनी यात्रा के दौरान कई अंतर-राज्य सीमाओं को पार करता है, इसलिए इसका परिवहन सीधे तौर पर भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-1 की एंट्री 41 के अधीन आता है, जो विदेशों के साथ व्यापार और अंतर-राज्य व्यापार को विनियमित करती है। परिणामस्वरूप, कोई भी एक राज्य सरकार, अकेले कार्य करते हुए, इस देशव्यापी सप्लाई चैनको स्वतंत्र रूप से ट्रैक या नियंत्रित करने का कानूनी अधिकार क्षेत्र या तकनीकी बुनियादी ढांचा नहीं रखती है। यह प्रभावी निगरानी के लिए एक केंद्रीय कानूनी ढांचे को संवैधानिक रूप से अनिवार्य बनाता है।"

इस रेगुलेटरी चुनौती के एक चिंताजनक पहलू पर जोर देते हुए, आबकारी मंत्री चीमा ने इस रसायन की ऑनलाइन बेरोक उपलब्धता की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, "मेथनॉल प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर आसानी से उपलब्ध है। वर्तमान में, इसे एक सामान्य रासायनिक वस्तु के रूप में देखा जाता है, जिसके कारण इसकी ऑनलाइन लिस्टिंग और बिक्री पूरी तरह से अनियमित रहती है। यह किसी भी व्यक्ति को बिना पहचान की पुष्टि, दस्तावेजों या किसी घोषित उद्देश्य के इस जहरीले पदार्थ को खरीदने की इजाजत देता है।"

वित्त मंत्री ने कहा कि परचून पहुंच की यह सहूलियत राज्य की प्रवर्तन एजेंसियों की इस रसायन के अवैध उपयोग को रोकने, निगरानी करने या पकड़ने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। वित्त मंत्री चीमा ने कहा, "चूंकि राष्ट्रीय ई-कॉमर्स चैनल विशेष रूप से केंद्रीय कानूनों द्वारा संचालित होते हैं, इसलिए ऑनलाइन सप्लाई चैनों शुरू से अंत तक जवाबदेही अनिवार्य करने के लिए एक केंद्रीय कानून ही एकमात्र प्रभावी तंत्र है।"

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि मौजूदा नियामक प्रणाली काफी बिखरी हुई है और कई पुराने कानूनों में विभाजित है, जिसमें पॉइज़न्स एक्ट 1919, पेट्रोलियम एक्ट 1934, और ज्वलनशील पदार्थ अधिनियम 1952 शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कोई भी कानून विशेष रूप से मेथनॉल के दुरुपयोग के अनोखे खतरों से निपटने के लिए नहीं बनाया गया था। उन्होंने कहा, "ये मौजूदा कानून मेथनॉल को केवल एक जहरीले, ज्वलनशील या खतरनाक रसायन के रूप में संबोधित करते हैं, और एक समर्पित ट्रैकिंग प्रणाली, खरीदार की रजिस्ट्रेशन, या समन्वित अंतर-राज्य ट्रैकिंग स्थापित करने में पूरी तरह से विफल रहते हैं।"

यह उजागर करते हुए कि राज्य के आबकारी कानून गैर-कानूनी उद्देश्यों के लिए मेथनॉल की बिक्री को रोकने के लिए अपर्याप्त हैं, आबकारी मंत्री चीमा ने कहा, "राज्यों के पारंपरिक आबकारी कानून संरचनात्मक रूप से सख्त राज्य लाइसेंस के तहत स्थानीय रूप से किण्वन द्वारा तैयार किए गए एथाइल अल्कोहल को विनियमित करने के लिए तैयार किए गए हैं। हालांकि, मेथनॉल एक पेट्रोलियम-आधारित उप-उत्पाद है जो पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं द्वारा उत्पन्न होता है और अंतर-राज्य राजमार्गों के माध्यम से राज्यों में प्रवेश करता है।"

उन्होंने कहा कि यह नियामक अंतराल तेजी से गंभीर होता जा रहा है क्योंकि नीति आयोग का रणनीतिक रोडमैप भारत की मेथनॉल उत्पादन क्षमता को बढ़ा रहा है। यह वृद्धि चोरी को समाप्त करने के लिए एथाइल और मिथाइल अल्कोहल की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह से अलग करना अत्यंत आवश्यक बनाती है।

इन प्रणालीगत कमजोरियों को दूर करने के लिए, आबकारी मंत्री चीमा ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री को पांच मुख्य सिफारिशें की हैं। पहला, राज्य उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के तहत एक विशेष केंद्रीय कानून बनाने का प्रस्ताव है ताकि इस रसायन के आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री, परिवहन और अंतिम उपयोग को व्यापक रूप से कवर किया जा सके। दूसरा, इस ढांचे के तहत बंदरगाह से ही सीधे शुरू होने वाली एक राष्ट्रीय एंड-टू-एंड ट्रैकिंग प्रणाली अनिवार्य की जानी चाहिए। तीसरा प्रस्ताव गैर-पंजीकृत या गैर-औद्योगिक खरीदारों को ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों के माध्यम से की जाने वाली बिक्री पर सख्त प्रतिबंध की मांग करता है। चौथा प्रस्ताव विशेष रूप से मेथनॉल को अवैध शराब में मिलाने को लक्षित करते हुए कठोर दंडात्मक प्रावधान निर्धारित करने की मांग करता है। अंत में, आबकारी मंत्री ने पांचवें प्रस्ताव के माध्यम से निर्बाध संघीय समन्वय सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री की अध्यक्षता में सभी राज्यों के आबकारी मंत्रियों की एक आवश्यक बैठक बुलाने के लिए केंद्र से अपील की है।

मानव जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग करते हुए, वित्त एवं आबकारी तथा कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आबकारी विभाग को निर्देश दिए कि वे इस महत्वपूर्ण जन सुरक्षा मुद्दे पर पहले भेजे गए उच्च-स्तरीय पत्राचार के संबंध में केंद्रीय मंत्रालय के अधिकारियों से तत्काल संपर्क करें। वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार पॉइज़न्स एक्ट और इससे संबंधित नियमों के तहत सख्त निगरानी, अधिक अंतर-विभागीय समन्वय और मजबूत प्रवर्तन के माध्यम से राज्य स्तर पर लगातार कड़े कदम उठा रही है।

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