हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने को भाजपा सरकार की डर और बौखलाहट का परिणाम बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार राहुल गांधी की आवाज को दबाकर देश के दलितों, पिछड़ों, वंचितों और कमजोर वर्गों की आवाज को दबाना चाहती है, लेकिन कांग्रेस इस लड़ाई से पीछे हटने वाली नहीं है। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने सार्वजनिक रूप से बताया कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनके भाषण के बाद मंच के ‘शुद्धिकरण’ की घटना ने उनकी भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई। इसके बावजूद भाजपा के मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेता इस घटना को उचित ठहराने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि सवाल केवल एक व्यक्ति के अपमान का नहीं, बल्कि भारत के संविधान द्वारा दिए गए समानता, सम्मान और सामाजिक न्याय के अधिकारों का है। उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा के नेता ‘शुद्धिकरण’ जैसी घटनाओं को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरी तरफ राहुल गांधी जब दलितों, पिछड़ों और वंचितों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी जाती है। यह कार्रवाई भाजपा की राजनीतिक बौखलाहट को दर्शाती है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस स्पष्ट कर देना चाहती है कि FIR, मुकदमों और सरकारी दबाव से राहुल गांधी की आवाज को नहीं दबाया जा सकता। राहुल गांधी देश के करोड़ों वंचित नागरिकों के अधिकारों की आवाज उठाते रहेंगे और कांग्रेस संविधान की रक्षा तथा सामाजिक बराबरी की लड़ाई को और मजबूती से आगे बढ़ाएगी।
हरियाणा में छात्रवृत्ति के आंकड़ों ने खोली भाजपा सरकार की पोल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हरियाणा विधानसभा में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति को लेकर सरकार की ओर से रखे गए आंकड़ों ने भाजपा सरकार की दलित और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के प्रति संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच एससी वर्ग के 4,81,657 विद्यार्थियों ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया, जिनमें 4,28,576 आवेदन स्वीकृत हुए, लेकिन भुगतान केवल 4,19,013 विद्यार्थियों को हुआ। यानी आवेदन, स्वीकृति और वास्तविक भुगतान के बीच स्पष्ट अंतर है।
इसी तरह ओबीसी वर्ग में इसी अवधि के दौरान 3,99,011 आवेदन आए, जिनमें 3,18,879 आवेदन स्वीकृत हुए। लेकिन भुगतान की स्थिति और भी चिंताजनक रही।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सबसे गंभीर मामला वर्ष 2024-25 का है, जब 52,023 ओबीसी विद्यार्थियों के आवेदन स्वीकृत होने के बावजूद एक भी विद्यार्थी को छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं हुआ। वहीं वर्ष 2023-24 में 50,910 आवेदन स्वीकृत होने के बावजूद केवल 17,937 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए आधार निष्क्रिय होने, सत्यापन में देरी, अधूरे दस्तावेज और बजट की उपलब्धता जैसी वजहें गिना रही है, लेकिन सवाल यह है कि इन समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी भी तो सरकार की ही है। गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थी सरकारी दफ्तरों और पोर्टल की तकनीकी खामियों का खामियाजा क्यों भुगतें?
बजट होने के बावजूद पूरी राशि खर्च नहीं कर पाई सरकार
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि ओबीसी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में कई वर्षों तक स्वीकृत बजट और वास्तविक वितरण में बड़ा अंतर रहा। वर्ष 2022-23 में 3,898.83 लाख रुपये के बजट के मुकाबले केवल 708.87 लाख रुपये वितरित किए गए। वर्ष 2023-24 में 5,904.77 लाख रुपये के मुकाबले 3,632.16 लाख रुपये और वर्ष 2024-25 में 776.04 लाख रुपये के मुकाबले मात्र 344.31 लाख रुपये वितरित हुए।
उन्होंने कहा कि एससी विद्यार्थियों के मामले में भी करोड़ों रुपये का बजट होने के बावजूद कई वर्षों में पूरी राशि वितरित नहीं की गई। वर्ष 2023-24 में 20,663.41 लाख रुपये के बजट के मुकाबले 15,146.57 लाख रुपये और 2024-25 में 13,605.47 लाख रुपये के मुकाबले केवल 8,447.88 लाख रुपये वितरित किए गए।
‘सबका साथ’ का दावा, लेकिन छात्रवृत्ति में दलित-पिछड़े विद्यार्थी परेशान
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देती है, लेकिन सरकारी आंकड़े उसकी जमीनी हकीकत बता रहे हैं। जिस छात्र को पढ़ाई जारी रखने के लिए छात्रवृत्ति की जरूरत है, उसके आवेदन को स्वीकृत करके भी पैसा न देना उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति कोई कृपा नहीं बल्कि शिक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने का संवैधानिक दायित्व है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आवेदन से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो।