शिमला : हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों मनाली और शिमला में कचरे के वैज्ञानिक निपटान को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को विधानसभा में यह स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए टिकाऊ और वैज्ञानिक व्यवस्था को प्राथमिकता देगी। विधानसभा में उठे सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने मनाली को “राज्य की खिड़की” बताते हुए कहा कि ठोस और तरल दोनों प्रकार के कचरे का पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने बताया कि मनाली में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 68 स्वच्छता कार्य और 27 वाहन पहले ही तैनात किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि रगदारी में एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है, जिसे एक निजी कंपनी को सौंपा गया है। उन्होंने माना कि कुल लगभग 1.99 लाख टन कचरे में से करीब 21 लाख टन पुराना (लीगेसी) कचरा अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है और इसका पूरी तरह निपटान नहीं हो पाया है। एसटीपी से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 1.29 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
लिखित जवाब के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 76 शहरी निकाय हैं, जिनमें दिसंबर 2024 में गठित 15 नए नगर पंचायत और मार्च 2026 में गठित एक और निकाय शामिल है। इनमें से 60 शहरी निकायों में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था लागू है, लेकिन स्रोत स्तर पर 100 प्रतिशत कचरा पृथक्करण अभी भी पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया है। वित्तीय दृष्टि से सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन 2.0 और 15वें वित्त आयोग के तहत पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई है।
वर्ष 2023-24 में 47.22 करोड़ रुपए, 2024-25 में 50.44 करोड़ रुपये और 2025-26 में 52.63 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई, हालांकि खर्च आवंटन की तुलना में कम रहा है। इन प्रयासों के बावजूद कई कमियां बनी हुई हैं। मंत्री ने स्वीकार किया कि मनाली के लेफ्ट बैंक जैसे क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन अभी भी कमजोर है और उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए स्वयं स्थल निरीक्षण करने का आश्वासन दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि ठोस कचरा प्रबंधन नीति 2018 के तहत नए प्रोसेसिंग प्लांट के लिए जमीन चिन्हित की जा रही है, मशीनरी को सूचीबद्ध किया जा रहा है और स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विधायक भुवनेश्वर गौर ने पर्यटन शहरों में स्वच्छता समस्याओं से निपटने के लिए मंत्री स्तर की एक नोडल एजेंसी बनाने की मांग की। सरकार ने इस सुझाव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए संकेत दिया है कि कचरा संकट से निपटने के लिए एक अधिक समन्वित और जवाबदेह व्यवस्था जल्द लागू की जा सकती है।