नई दिल्ली(एजेंसी) : भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि आतंकवाद को मानवता के खिलाफ अपराधों की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए। देश का मानना है कि इन अपराधों की रोकथाम और सजा के लिए तैयार हो रहे नए अंतरराष्ट्रीय समझौते में आतंकवाद को भी जगह दी जानी जरूरी है।
भारत की प्रतिनिधि ने की महत्वपूर्ण टिप्पणी
भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन की काउंसलर आर. मैथिली ने सोमवार को जनरल असेंबली की छठी समिति की बैठक में कहा, “आतंकवादियों द्वारा किए गए अपराध और अत्याचार, जो तय पैमाने पर खरे उतरते हैं, उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के दायरे में उचित रूप से शामिल किया जाना चाहिए।” यह समिति कानूनी मामलों पर काम करती है और मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े 2028 के सम्मेलन पर चर्चा कर रही थी।
आतंकवाद की गंभीरता को ध्यान में रखने की जरूरत
मैथिली ने जोर दिया कि आतंकवादी गतिविधियों की गंभीर प्रकृति और लोगों पर उनके गहरे प्रभाव को देखते हुए, इन्हें संधि के ड्राफ्ट आर्टिकल्स के समग्र दृष्टिकोण के अनुरूप देखा जाना चाहिए। मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं को बस नई संधि में शामिल कर लेने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने याद दिलाया कि देशों की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे अपने राष्ट्रीय कानूनों के तहत मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और बड़े पैमाने पर होने वाले अत्याचारों के लिए न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करें। संधि में इस सिद्धांत को और मजबूत किया जाना चाहिए कि लोगों को मानवता के खिलाफ अपराधों से बचाने की मुख्य जिम्मेदारी देशों की ही है।
संप्रभुता और क्षेत्राधिकार पर जोर
भारत ने इस बात पर भी बल दिया कि देशों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे अपने नागरिकों द्वारा किए गए सबसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और बड़े पैमाने पर अत्याचारों के लिए न्याय सुनिश्चित करें। न्याय के हितों, आरोपी के अधिकारों और पीड़ितों के हितों को ध्यान में रखते हुए देशों के पास अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) की प्राथमिकता होनी चाहिए। मैथिली ने स्पष्ट कहा कि मानवता के खिलाफ अपराधों को रोकने और सजा देने के किसी भी उपाय में देशों की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में दखल न देने के सिद्धांत का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।
2028 का सम्मेलन और संधि की तैयारी
जनरल असेंबली ने 2004 में एक प्रस्ताव के जरिए 2028 में मानवता के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सजा पर सम्मेलन आयोजित करने का आह्वान किया था। इसके लिए दो तैयारी सम्मेलन होने हैं, जिनमें से पहला जनवरी में हो चुका है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस सम्मेलन का लक्ष्य एक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता अपनाना है, जो इन अपराधों की रोकथाम और सजा सुनिश्चित करे। भारत का यह बयान वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कानूनी ढांचा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।