नई दिल्ली : भारत में बिजली की बढ़ती खपत और उत्पादन में तेजी के बीच वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए बिजली की मांग में वृद्धि का अनुमान 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में यह अनुमान जताते हुए आगाह किया है कि थर्मल पावर प्लांट में कोयले का सीमित स्टॉक बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2026 में अब तक बिजली उत्पादन में सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह पिछले 15 वर्षों में किसी महीने के दौरान सबसे मजबूत रुझान है। इसमें कोविड के बाद के वर्ष 2021 को अपवाद माना गया है। चालू वित्त वर्ष में अब तक बिजली की मांग में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
जेफरीज ने कहा कि इसी मजबूत मांग को देखते हुए FY27 के लिए बिजली मांग वृद्धि का अनुमान बढ़ाया गया है। ब्रोकरेज को वित्त वर्ष 2027-28 (FY28) में भी बिजली की मांग 6 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 में अल नीनो की स्थिति दोबारा बनने पर मांग में और तेजी आ सकती है। सामान्य से अधिक तापमान और लगातार बढ़ती खपत से थर्मल पावर तथा रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल होने की संभावना है।
थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक घटा
बिजली की मांग बढ़ने से चालू वित्त वर्ष में अब तक थर्मल पावर प्लांट की क्षमता उपयोग दर 68 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 62 प्रतिशत थी। हालांकि, इन संयंत्रों में कोयले का स्टॉक घटकर खपत के लिहाज से सिर्फ छह दिन का रह गया है। एक साल पहले यह स्टॉक 15 दिन की खपत के बराबर था।
इस बीच, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक रिन्यूएबल एनर्जी से बिजली उत्पादन में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़कर 20 प्रतिशत हो गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 17 प्रतिशत थी।
सौर ऊर्जा उत्पादन में 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके विपरीत, जून से सितंबर के मानसून सीजन में औसत से कम बारिश के कारण हाइड्रो पावर उत्पादन में 12 प्रतिशत की गिरावट आई।
बिजली बाजार में कीमतों में उछाल
रिपोर्ट में मर्चेंट पावर मार्केट में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया है। इस बाजार में बिजली की खरीद-बिक्री लंबी अवधि के अनुबंधों से अलग होती है।
जुलाई-सितंबर तिमाही में बिजली की औसत कीमत सालाना आधार पर 46 प्रतिशत और पिछली तिमाही की तुलना में 12 प्रतिशत बढ़कर 5.7 रुपये प्रति यूनिट हो गई। वहीं, अक्टूबर में अब तक बिजली की कीमत सालाना आधार पर 2.6 गुना बढ़कर 7.1 रुपये प्रति यूनिट पहुंच गई है।
रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं को मिल सकता है बढ़ावा
जेफरीज को बिजली की मांग में सुधार के साथ रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं के आवंटन में भी तेजी आने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026-27 में अक्टूबर तक 8.3 गीगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का आवंटन किया गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 7.7 गीगावाट था।
ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2029-30 (FY30) तक भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़कर 52 प्रतिशत हो सकती है। फिलहाल यह हिस्सेदारी 44 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि देश में बिजली की कुल मांग वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमानित 1,709 अरब यूनिट से बढ़कर FY30 तक 2,219 अरब यूनिट पहुंच सकती है।