घरेलू म्यूचुअल फंड उद्योग का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वित्त वर्ष 2025-26 में 12.2 प्रतिशत बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। Association of Mutual Funds in India द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे साल में उद्योग के एसेट बेस में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, हालांकि इक्विटी बाजार में उतार-चढ़ाव का असर समग्र वृद्धि पर पड़ा।
मार्च के आंकड़ों के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद इक्विटी फंड्स में निवेशकों की रुचि में मजबूत वापसी देखी गई। सक्रिय रूप से प्रबंधित इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश बढ़कर 40,450.26 करोड़ रुपये हो गया, जो जुलाई 2025 के बाद सबसे अधिक है। फरवरी में यह आंकड़ा 25,977.81 करोड़ रुपये था।
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश मार्च में रिकॉर्ड 32,087 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये से अधिक है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी का संकेत मिलता है।
म्यूचुअल फंड उद्योग में मार्च के दौरान 2.39 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निकासी (नेट आउटफ्लो) दर्ज किया गया, जबकि फरवरी में 94,530 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ था। डेट म्यूचुअल फंड्स में मार्च में 2.94 लाख करोड़ रुपये की निकासी देखी गई। इसके अलावा, गोल्ड ETF में निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपये रह गया, जो फरवरी में 5,254.95 करोड़ रुपये था।
इक्विटी श्रेणियों में फ्लेक्सी-कैप फंड्स में सबसे ज्यादा 10,054.12 करोड़ रुपये का निवेश आया। स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स में क्रमशः 6,263.56 करोड़ रुपये और 6,063.53 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि लार्जकैप फंड्स में 2,997.84 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया।
हालांकि, AUM में वृद्धि की रफ्तार पिछले वर्षों की तुलना में कम रही। वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 23 प्रतिशत और 2023-24 में 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।