नई दिल्ली : सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में तेजी लाई है।
बयान में कहा गया है कि संकट की शुरुआत के बाद से भारी उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की रफ्तार बनाए रखने और ईवी कंपोनेंट्स की सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल और उत्पादन की गति बनाए रखने के लिए 10,900 करोड़ रुपए की पीएम ई-ड्राइव योजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।
सरकार ने बयान में कहा है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया सेगमेंट को 31 जुलाई 2026 तक तीन महीने के लिए बढ़ाया गया है, जबकि इलेक्ट्रिक तीनपहिया सेगमेंट, जिसमें ई-रिक्शा और ई-कार्ट शामिल हैं, को 31 मार्च 2028 तक दो साल के लिए बढ़ाया गया है।
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत नीति समर्थन को इस तरह सरल बनाया गया है कि प्रोत्साहन योजनाएं लगातार जारी रहें, ईवी अपनाने में तेजी आए और घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिले।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 नवंबर 2025 को 7,280 करोड़ रुपए की लागत से 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम)' निर्माण को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी थी।
इस योजना का लक्ष्य भारत में 6,000 एमटीपीए की एकीकृत आरईपीएम निर्माण क्षमता स्थापित करना है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए जरूरी सप्लाई चेन मजबूत हो सके और 'आत्मनिर्भर भारत' व 'नेट जीरो 2070' जैसे लक्ष्यों को समर्थन मिले।
साथ ही बयान में कहा गया है कि सरकार आरईपीएम योजना को तेजी से लागू करने के लिए कदम उठा रही है, जिससे ईवी कंपोनेंट्स का स्थानीय स्तर पर निर्माण बढ़ाया जा सके। इसके लिए उद्योग जगत, ओईएम और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार बातचीत की जा रही है।
इस दिशा में 7 अप्रैल 2026 को 25 प्रमुख कंपनियों के साथ एक प्री-बिड बैठक आयोजित की गई थी, जबकि 20 मार्च 2026 को टेंडर (आरएफपी) जारी किया गया था। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से सीपीपी पोर्टल पर की जा रही है।
इन प्रयासों को फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम का भी समर्थन मिल रहा है, जिसका उद्देश्य ईवी निर्माण में घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाना है।
सरकार का कहना है कि पीएम ई-ड्राइव, आरईपीएम और फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम के संयुक्त प्रभाव से ईवी इकोसिस्टम पूरी तरह मजबूत होगा।
जहां पीएम ई-ड्राइव योजना मांग बढ़ाने में मदद करेगी, वहीं आरईपीएम योजना सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों को दूर करेगी। जबकि फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम आयात पर निर्भरता कम करने में सहायक होगा।
इन पहलों से मैन्युफैक्चरर्स, एमएसएमई और कंपोनेंट सप्लायर्स को घरेलू उत्पादन, स्थिर सप्लाई चेन और निवेश के बेहतर मौके मिलेंगे।
बयान में आगे कहा गया है कि नागरिकों के लिए इन कदमों का फायदा यह होगा कि इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते, आसानी से उपलब्ध और ज्यादा भरोसेमंद बनेंगे। साथ ही, आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होने से वैश्विक कीमतों के असर से भी कुछ हद तक राहत मिलेगी।