बांग्लादेश में आज गुरुवार को संसद सदस्य देश के 23वें राष्ट्रपति का चुनाव करेंगे। यह 35 वर्षों में पहली बार है जब राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हो रहा है। संसद भवन में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक कुल 349 सांसद अपना वोट डाल सकेंगे।
बीएनपी और गठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने
सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का मुकाबला कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद से है। ओली अहमद बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार हैं। संसद में बीएनपी के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण मिर्जा फखरुल की जीत की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है।
1991 के बाद पहला मुकाबला वाला चुनाव
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, 8 अक्टूबर 1991 के बाद यह पहला राष्ट्रपति चुनाव है जिसमें एक से अधिक उम्मीदवार हैं। उस समय बीएनपी उम्मीदवार अब्दुर रहमान बिस्वास ने अवामी लीग के जस्टिस बदरुल हैदर चौधरी को हराया था। उसके बाद से संसदीय प्रणाली के तहत राष्ट्रपति चुनाव निर्विरोध होते रहे हैं। संसद में 350 सीटें हैं, जिनमें 300 सामान्य और महिलाओं के लिए 50 आरक्षित सीटें शामिल हैं। चटगांव-4 सीट खाली होने के कारण 349 सांसद मतदान करेंगे।
संविधान का अनुच्छेद 70 और मतदान प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 70 के तहत पार्टी के खिलाफ वोट देने वाले सांसद की सदस्यता समाप्त हो सकती है। मतदान संसद के मुख्य कक्ष में होगा, जहां सांसद बैलेट बॉक्स में वोट डालने से पहले अपनी पसंद बताएंगे। शाम 5 बजे मतदान खत्म होने के तुरंत बाद मतगणना शुरू होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त नतीजे की घोषणा करेंगे और पूरी प्रक्रिया का लाइव टेलीकास्ट होगा।
चुनाव से पहले बीएनपी की बैठक
चुनाव की पूर्व संध्या पर बीएनपी संसदीय दल ने बुधवार को संसद भवन में बैठक की, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री और सदन के नेता तारिक रहमान ने की। उम्मीदवार मिर्जा फखरुल भी इसमें शामिल हुए। चीफ व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने कहा कि यह चुनाव देश की लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।
राष्ट्रपति चुनाव की बदलती व्यवस्था
आजादी के बाद बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनने की व्यवस्था कई बार बदली। संसदीय व्यवस्था के तहत पहला चुनाव 1974 में हुआ, जिसमें स्पीकर मोहम्मदउल्लाह राष्ट्रपति बने। 1978 में जिया-उर-रहमान, 1981 में जस्टिस अब्दुस सत्तार और 1986 में हुसैन मुहम्मद इरशाद सीधे जनता के वोट से राष्ट्रपति चुने गए।