अमृतसर । बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के जरिए तैयार की गई श्री हरिमंदिर साहिब की आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद सिख संगतों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने सख्त रुख अपनाया है। एसजीपीसी के प्रवक्ता और कानूनी विशेषज्ञ अमरबीर सिंह सियाली ने आईएएनएस से बात करते हुए इस घटना को सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया है। उन्होंने कहा कि एआई जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग जहां समाज और देश के विकास के लिए होना चाहिए, वहीं कुछ शरारती तत्व इसका गलत इस्तेमाल कर धार्मिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि इस संबंध में एसजीपीसी ने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार को लिखित शिकायत भेजी है। साथ ही मांग की गई है कि जिस तरह कई यूरोपीय देशों में इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, उसी तरह भारत में भी आईटी एक्ट में संशोधन कर सख्त कानून बनाया जाए।.
सियाली ने कहा कि श्री हरिमंदिर साहिब एक पवित्र स्थान है, जहां सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए दरवाजे खुले हैं और जहां 'सरबत दा भला' की भावना सिखाई जाती है। ऐसे पवित्र स्थल को लेकर गलत और भ्रामक वीडियो बनाना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह मानसिक विकृति को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस तरह की घटनाओं के पीछे कुछ संगठित ताकतें या एजेंसियां हो सकती हैं, जो धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। एसजीपीसी के आईटी विंग की ओर से इस मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है। सियाली ने विदेश मंत्रालय से भी अपील की है कि वह अमेरिका सहित अन्य देशों की टेक कंपनियों से संपर्क स्थापित करें, ताकि ऐसी आपत्तिजनक और हेट स्पीच वाली सामग्री को तुरंत इंटरनेट से हटाया जा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी भारत में पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाती है, लेकिन विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई के लिए सरकार का हस्तक्षेप बेहद जरूरी है। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर एआई तकनीक के दुरुपयोग और धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।