संगरूर : बस चालकों के लिए बेहद खास खबर सामने आई है। दरअसल, एक बार फिर चक्का जाम की खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, 22 सितंबर से पूरे पंजाब में पनबस और PRTC के पक्के चक्के जाम करने का ऐलान किया गया है। पंजाब रोडवेज, पनबस/PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन संगरूर के डिपो प्रेसिडेंट हरप्रीत सिंह ग्रेवाल ने वर्कर्स को संबोधित करते हुए कहा कि लगभग 4 साल में सरकार के साथ 59 मीटिंग करने के बावजूद सिवाय विलाप के कुछ हासिल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के तहत GST, कमीशन और रिश्वत के जरिए डिपार्टमेंट और कर्मचारियों को लूटा जा रहा है। लिखित शिकायत और सबूत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और वर्कर्स का EPF और ESI जमा नहीं किया जा रहा। विरोध के बावजूद नए कॉन्ट्रैक्टर रखे जा रहे हैं। नए ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर भी पिछले 3 महीने से 10-10 दिन का समय मांग रहे हैं और विलाप कर रहे हैं।
वाइस प्रेसिडेंट रमनदीप सिंह, लखविंदर सिंह बिट्टू और असिस्टेंट सेक्रेटरी गुरजीत सिंह ने कहा कि कम सैलरी और समय पर न आने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकार फ्री सफर की सुविधा के करीब 1200 करोड़ रुपये जारी नहीं कर रही है और कर्मचारियों को परमानेंट नहीं कर रही है। इसके विरोध में 22 सितंबर से गेट रैली के साथ पक्का रोड जाम किया जाएगा।
वाइस प्रेसिडेंट परमिंदर सिंह जस्सर, गुरदीप सिंह और गुरप्रीत सिंह ने कहा कि नई बसें लाने के बजाय सरकार ने किलोमीटर स्कीम की बसों को फ्लैग ऑफ करके गलत नंबर बनाने की कोशिश की है। किलोमीटर स्कीम का विरोध करने पर कर्मचारियों पर केस दर्ज करके उन्हें जेल में डालकर तानाशाही रवैया अपनाया गया। नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर 17 सितंबर 2026 की मीटिंग में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सर्विस रूल्स के तहत रेगुलर करने, आउटसोर्स कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर करने, समान काम के लिए समान वेतन लागू करने और पर्चे कैंसिल करने जैसी मांगों का हल नहीं निकला तो 22 सितंबर से पूरे पंजाब में ट्रैफिक जाम किया जाएगा।
पंजाब रोडवेज, पनबस/PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन संगरूर 25/11 के डिपो प्रेसिडेंट हरप्रीत सिंह ग्रेवाल ने वर्कर्स को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार के साथ करीब 4 साल से करीब 59 मीटिंग हो चुकी हैं। हर बार सरकार ने भरोसा देकर संघर्ष को टाल दिया। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर भी पिछले 3 महीने से लगातार नारे लगा रहे हैं। हर मीटिंग में 10 दिन का समय मांगा जा रहा है। अब यूनियन ने सरकार को 10 दिन का और समय देकर अगले संघर्ष का ऐलान किया है।