Friday, April 24, 2026
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नी मूवमेंट : रोजाना कुछ मिनट का अभ्यास देगा बेहतर संतुलन और ताकत, जॉइंट्स की समस्या में भी राहत

24 अप्रैल, 2026 01:41 PM

बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में दर्द और कमजोरी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में योग का एक आसान अभ्यास ‘नी मूवमेंट’ या ‘समस्थिति’ इन समस्याओं से राहत दिलाने में प्रभावी साबित हो सकता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, नी मूवमेंट घुटनों और हिप जॉइंट्स को मजबूत बनाता है, निचले शरीर की स्थिरता बढ़ाता है और ताकत प्रदान करता है। इसे योग की आधारभूत मुद्रा माना जाता है। यह अभ्यास न केवल शारीरिक बल बढ़ाता है बल्कि मानसिक एकाग्रता भी सुधारता है। योग एक्सपर्ट के अनुसार, नी मूवमेंट अभ्यास के लिए सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों को जोड़ लें। हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें। नजर सामने की ओर रखें और पूरा शरीर संतुलित रखते हुए हवा में बैठने की मुद्रा बनाएं। इस मुद्रा में कुछ मिनट तक खड़े रहें। शरीर को पूरी तरह सतर्क और स्थिर रखना होता है। यह आसन घर पर बिना किसी उपकरण के आसानी से किया जा सकता है।


नी मूवमेंट को योग में आधारभूत मुद्रा भी कहते हैं, जिसके नियमित अभ्यास से घुटनों और कूल्हे के जोड़ों में मजबूती आती है। शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों में होने वाली कमजोरी दूर होती है। जोड़ों पर अनावश्यक दबाव कम होता है और दैनिक जीवन में बेहतर संतुलन मिलता है। साथ ही, यह मुद्रा मानसिक एकाग्रता बढ़ाती है, फोकस सुधारती है और तनाव कम करने में मदद करती है।


नी मूवमेंट सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने का एक प्रभावी तरीका है। व्यस्त जीवनशैली में कुछ मिनट का यह अभ्यास कई बड़े फायदे दे सकता है। यह अभ्यास विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें घुटनों या कूल्हों में दर्द की शिकायत रहती है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना कुछ मिनट इस मुद्रा में खड़े रहने से शरीर की नींव मजबूत होती है और स्वास्थ्य में सुधार आता है।


यह आसन बेहद सरल है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति को आर्थराइटिस की गंभीर समस्या है या जोड़ों में सूजन है तो इस अभ्यास से बचना चाहिए। ऐसे लोगों को डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही अभ्यास शुरू करनी चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति इसे बिना किसी खतरे के कर सकते हैं।

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