कसौली : हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय अनुसंधान संस्थान में स्वदेशी रूप से निर्मित टेटनस और टीडी वैक्सीन स्वास्थ्य के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि टीडी वैक्सीन किशोरों और वयस्कों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को भी टीटनेस और डिफ्थीरिया से सुरक्षा प्रदान करेगी। उन्होंने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत को व्यापक रूप से विश्व की औषधालय के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह विश्व स्तर पर अग्रणी टीका निर्माताओं में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियामक प्रणालियों के वैश्विक मानकीकरण में भारत ने परिपक्वता स्तर तीन प्राप्त कर लिया है, जो इसके टीका नियामक ढांचे की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सीआरआई जैसे संस्थानों ने इन मानकों को प्राप्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने याद दिलाया कि ऐतिहासिक रूप से टीके और दवाओं के विकास में लंबा समय लगता था। टेटनस के टीके को विकसित होने में विश्व स्तर पर दशकों लग गए, तपेदिक की दवाइयों को विकसित होने में लगभग 30 साल लगे और जापानी एन्सेफलाइटिस के टीके के लिए लगभग एक सदी का वैज्ञानिक प्रयास करना पड़ा। इसके विपरीत कोविड के दौरान भारत ने नौ महीनों के भीतर दो स्वदेशी टीके विकसित किए और बूस्टर खुराक सहित 220 करोड़ से अधिक खुराकें दीं। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि, डा. डिंपल कसाना निदेशक, केंद्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अन्य हितधारक उपस्थित थे। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे 62 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिल रहा है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में सीआरआई का अहम योगदान
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भारत के वैश्विक एकजुटता प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि वैक्सीन मैत्री पहल के तहत भारत ने लगभग 100 देशों को टीके उपलब्ध कराए, जिनमें से 48 देशों को टीके मुफ्त में मिले। सीआरआई जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के योगदान से घरेलू और वैश्विक दोनों जरूरतों को पूरा करने की भारत की क्षमता मजबूत हुई है। सीआरआई गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रेक्टिस (जीएमपी) मानकों के तहत टीकों का निर्माण करने वाला पहला सरकारी संस्थान है।
25 करोड़ गर्भवतियों, बच्चों को लाभ
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वार्षिक टीकाकरण कार्यक्रम में लगभग पांच करोड़ लाभार्थी शामिल हैं, जिनमें लगभग 25 करोड़ गर्भवती महिलाएं और 25 करोड़ बच्चे शामिल हैं। व्यवस्थित निगरानी और निरंतर टीकाकरण प्रयासों के कारण देश में टीकाकरण कवरेज लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव बताया, जिसमें सीआरआई जैसी संस्थाओं ने अहम भूमिका निभाई है।