नई दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर छात्रों के प्रति कठोर रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग करने वाले विद्यार्थियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, मानो वे देश के दुश्मन हों। उन्होंने कहा कि छात्रों के सवालों का जवाब देने के बजाय सरकार ने उनके विरोध को दबाने का रास्ता चुना है। अंग्रेजी दैनिक द हिंदू में प्रकाशित अपने लेख "शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा" में सोनिया गांधी ने कहा कि देशभर में छात्रों का आंदोलन मौजूदा शिक्षा व्यवस्था से बढ़ती निराशा और सरकार की जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति का परिणाम है। उनके अनुसार, छात्र केवल बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा। सोनिया गांधी ने कहा कि देश के छात्रों के साथ खड़ा होना केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। उनका दावा है कि छात्रों ने सरकार के शिक्षा संबंधी दावों की वास्तविकता को उजागर किया है और यही वजह है कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कई आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती गई थी। उन्होंने वर्ष 2020 के सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों के दौरान विश्वविद्यालय परिसरों में हुई पुलिस कार्रवाई और महिला पहलवानों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे घटनाक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं।
सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।