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धर्म

चैत्र रामनवमी पर महाकालेश्वर मंदिर में उमड़ी आस्था की अविरल धारा

27 मार्च, 2026 01:04 PM

चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर शुक्रवार को उज्जैन में महाकाल के दर पर सुबह से भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। बाबा की विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचे। पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के नारों से गूंज उठा। श्रद्धालु देर रात से अपने इष्ट के दर्शन के लिए देर रात से ही लंबी कतारों में लगे हुए थे। रोज की तरह शुक्रवार को भी सुबह बाबा के कपाट खोले गए और भस्म आरती के बाद महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया।

सबसे पहले भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया और बाद में पंचामृत से स्नान करवाया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।

राम नवमी होने के कारण बाबा का आज का श्रृंगार खास था। बाबा का श्रृंगार करने के लिए उनके माथे पर चांदी का सुंदर त्रिपुंड लगाया गया और उनके माथे पर राम लिखा था, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजा सामग्री से बाबा को सजाया गया। फिर, बाद में महाकाल की कपूर आरती की गई और उसके बाद उन्हें भोग लगाया गया।

भक्तों ने इस पवित्र आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य रूप का आनंद लिया। हर तरफ ‘हर हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारे गूंज रहे थे। मंदिर का पूरा परिसर भक्ति भाव से भर गया था। यह आरती वैराग्य और मृत्यु के सत्य का प्रतीक है। बाबा पर चढ़ने वाली भस्म कपिला गाय के कंडों की राख, पलाश, बड़, पीपल और बेर की लकड़ियों को जलाकर विशेष रूप से तैयार की जाती है। आरती के दौरान शिवलिंग पर लगभग ढाई किलो भस्म चढ़ाई जाती है, जिससे बाबा महाकाल को जगाने की परंपरा पूरी की जाती है। भस्म आरती के दौरान महिलाएं घूंघट करती हैं और पुरुषों को धोती पहननी होती है

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