मुंबई : दो किस्तों के बाद लस्ट स्टोरीज़ ने अपनी पहचान अच्छी तरह बना ली है। तीसरा चैप्टर कोई पूरी तरह नया फॉर्मूला लेकर नहीं आता, बल्कि इससे भी मजेदार काम करता है। चार फिल्ममेकर्स को अपनी-अपनी तरह से चाहत, रिश्तों और इंटिमेसी को समझने और दिखाने की पूरी आज़ादी मिलती है। नतीजा? ऐसी एंथोलॉजी जो कभी आपको असहज करती है, कभी हंसाती है, कभी इमोशनल करती है और कभी अपने क्वर्की अंदाज़ से चौंका देती है।
विक्रमादित्य मोटवानी का सेगमेंट, जिसमें राधिका आप्टे, कोंकणा सेनशर्मा, विजय वर्मा और अभिषेक शर्मा नजर आते हैं, अपने प्रिमाइस के मामले में शायद सबसे ज्यादा बेबाक है। पति-पत्नी की अदला-बदली यानी ‘हसबैंड स्वैपिंग’ जैसा विषय आसान नहीं है। लेकिन कोरियन फिक्शन से इंस्पायर्ड ट्रीटमेंट कहानी को एक अलग ही रंग देता है। कलाकार अपनी शानदार परफॉर्मेंस से कहानी को सिर्फ उसके बोल्ड आइडिया तक सीमित नहीं होने देते। किरण राव वाला चैप्टर लाता है फुल ऑन मज़ा।
गुरफतेह पीरज़ादा और सना थंपी की कहानी ड्रग्स, पैसे और धोखे के चक्कर में ऐसी उलझती है कि लगता है अब कौन किसको बेवकूफ बना रहा है! इसका ट्रीटमेंट एक क्लासिक कॉन स्टोरी जैसा है, लेकिन कहानी लगातार नए ट्विस्ट फेंकती रहती है। खासकर एक ट्विस्ट तो वाकई मजेदार सरप्राइज़ बनकर आता है। फिर आती है शकुन बत्रा की कहानी, जहां अली फज़ल और राधिका मदान रिश्तों की उन हकीकतों से रूबरू होते हैं जो ग्लैमर से कोसों दूर हैं।
शादी, लस्ट, थेरेपी, माता-पिता का दबाव और तलाक, सब मिलकर रिश्तों का ऐसा इमोशनल घालमेल तैयार करते हैं, जहां सही और गलत के बीच की लाइन काफी धुंधली हो जाती है। यही इस सेगमेंट की खूबसूरती है कि यह समझता है कि रिश्ते कभी भी सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट नहीं होते। विशाल भारद्वाज की 1987 में सेट कहानी माहौल को पूरी तरह बदल देती है।
अदिति राव हैदरी, सिद्धार्थ और गजराज राव सेक्स एजुकेशन से जुड़ी कहानी का हिस्सा हैं, और पीरियड सेटिंग इसका मज़ा और बढ़ा देती है। ‘नक्स वोमिका’ और ‘बेलाडोना’ जैसे रेफरेंसेज़ इस कहानी में एक अलग ही क्वर्की तड़का लगाते हैं और इसे बाकी कहानियों से अलग पहचान देते हैं। आखिरकार ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’ की असली खूबसूरती भी यही है।
फिल्म चारों कहानियों को एक जैसा बनाने की कोशिश नहीं करती। एक कहानी आपको असहज कर सकती है, दूसरी हंसा सकती है, तीसरी आपको रिश्तों के बारे में सोचने पर मजबूर कर सकती है और चौथी अचानक अपने ट्विस्ट से चौंका सकती है। अगर आपको ऐसी ओटीटी फिल्में पसंद हैं जिनमें रिश्तों की सीधी-सपाट कहानी के बजाय उनकी उलझी हुई परतें दिखाई जाएं, तो लस्ट स्टोरीज 3 में देखने के लिए पर्याप्त सामग्री है. बस इसे केवल बोल्ड कहानियों का संग्रह समझकर देखना इसके असली एंगल को छोटा कर देगा. इसे 4 की रेटिंग दी जा रही है।