देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है और चिलचिलाती धूप लोगों का जीना मुश्किल कर रही है। ऐसे में बिजली वाले कूलर या फ्रिज पर निर्भर रहने के बजाय पारंपरिक मिट्टी के बर्तन एक बार फिर लोकप्रिय हो रहे हैं। घड़े के अलावा, मिट्टी के बोतल, कुल्हड़ और गिलास भी प्राकृतिक ठंडक देने के साथ ही पानी और पेय पदार्थों का स्वाद बढ़ाने में कारगर होते हैं।
मिट्टी के बर्तन गर्मी के मौसम में प्राकृतिक रूप से पानी को ठंडा रखते हैं। मिट्टी की नमी के कारण वाष्पीकरण होता है, जो पानी के तापमान को कम करता है। इसमें रखा पानी न सिर्फ ठंडा रहता है बल्कि मिट्टी के खनिजों से भरपूर भी हो जाता है। प्लास्टिक या स्टील के बर्तनों के मुकाबले मिट्टी के बर्तन पानी को केमिकल-मुक्त और स्वादिष्ट बनाते हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) मिट्टी के बर्तनों के इस्तेमाल के फायदों के बारे में जानकारी देता है। मिट्टी के बर्तन प्राकृतिक ठंडक देते हैं, यह बिना बिजली के पानी को 8-10 डिग्री ठंडा रख सकते हैं। मिट्टी का पानी क्षारीय होता है, जो पेट की अम्लता कम करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यही नहीं, कुल्हड़ में चाय, छाछ या जूस पीने पर मिट्टी की सौंधी खुशबू स्वाद को और भी खास बना देती है।
गर्मी के इस मौसम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों सलाह देते हैं कि कोल्ड ड्रिंक्स की जगह मिट्टी के बर्तनों में रखा पानी या पेय ज्यादा फायदेमंद है। इससे गर्मी से होने वाली डिहाइड्रेशन और पेट संबंधी समस्याओं से बचाव होता है। मिट्टी के बर्तनों में रखा पानी शरीर को ठंडक पहुंचाता है, गर्मी से होने वाली थकान और जलन कम करता है। साथ ही ये बर्तन पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल हैं और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद करते हैं।
मिट्टी की बोतल या क्ले बॉटल बाहर घूमने या ऑफिस ले जाने के लिहाज से भी बहुत सुविधाजनक है। यह पानी को लंबे समय तक ठंडा और ताजा रखती है। कुल्हड़ एक बार इस्तेमाल के बाद फेंकने योग्य होते हैं, जिससे स्वाद के साथ स्वच्छता भी बनी रहती है। वहीं, मिट्टी का घड़ा परिवार के लिए ठंडा पानी उपलब्ध कराता है।