कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शुक्रवार को अमृतसर में एएसआई हरजीत सिंह की हत्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस घटना से पता चलता है कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य नहीं है। कांग्रेस सांसद ने केंद्र व राज्य सरकार से कड़े कदम उठाने की भी मांग की। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने समाचार एजेंसी से कहा, "यह बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक पुलिसकर्मी को गोली मारी गई और उनकी जान चली गई। इससे अधिक दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता है? यह साफ दिखाता है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य नहीं है।" उन्होंने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है और यहां बाहरी ताकतों, खासकर हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान का हस्तक्षेप रहता है। ड्रोन के जरिए ड्रग्स और हथियार भी आते हैं। इसलिए, केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत मजबूत और दुरुस्त रहे।
अमृतसर के भगतनवाला में ड्यूटी के दौरान एएसआई हरजीत सिंह की मोटरसाइकिल सवार दो अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 3 बजे हुई, जब हमलावर अधिकारी के पास पहुंचे और बहुत करीब से उन पर कई गोलियां चलाईं। हमले के बाद हरजीत सिंह को पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वह तरनतारन जिले के रहने वाले थे।
पुलिस ने गोलीबारी की परिस्थितियों और हमलावरों की पहचान के बारे में जांच शुरू कर दी है।
वहीं, पंजाब में ड्रग्स की स्थिति पर मनीष तिवारी ने कहा कि राज्य को अभी भी एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर कोई कहता है कि आज पंजाब में ड्रग्स की समस्या नहीं है, तो वह पंजाब के लोगों को गुमराह कर रहा है।
मनीष तिवारी ने कहा, "जब 1995 में पंजाब में आतंकवाद का दौर खत्म हुआ, तो पाकिस्तान ने नार्को-टेररिज्म का दौर शुरू कर दिया। लोगों को यह पूरी तरह समझने में लगभग डेढ़ दशक लग गया कि क्या हो रहा था। 2009-2010 तक, लोगों को यह एहसास होने लगा कि यह पंजाब और देश को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश थी। उसके बाद अलग-अलग सरकारों ने स्थिति को किसी तरह नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन अगर कोई कहता है कि आज पंजाब में ड्रग्स की समस्या नहीं है, तो वह पंजाब के लोगों को गुमराह कर रहा है।"
उन्होंने कहा, "यह सिर्फ पंजाब की बात नहीं है। आज पूरा उत्तरी क्षेत्र, जिसमें चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा शामिल हैं, ड्रग्स की एक बहुत गंभीर और संवेदनशील समस्या का सामना कर रहा है।"