प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘सुभाषितम’ साझा किया। इसमें उन्होंने महाभारत के शान्तिपर्व के एक श्लोक के माध्यम से कर्मठ, शूरवीर, धैर्यवान और विद्वान व्यक्ति के जीवन में समृद्धि के महत्व को बताया।
महाभारत के शान्तिपर्व का श्लोक
पीएम नरेंद्र मोदी ने महाभारत के शान्तिपर्व का श्लोक, “अद्वैधमनसं युक्तं शूरं धीरं विपश्चितम्। न श्रीः सन्त्यजते नित्यमादित्यमिव रश्मयः॥” साझा किया। इसका हिंदी अर्थ है कि जिस व्यक्ति का मन दुविधारहित हो और जो कर्मठ, शूरवीर, धैर्यवान तथा विद्वान हो, समृद्धि उसका साथ कभी नहीं छोड़ती, जैसे सूर्य का साथ उसकी किरणें कभी नहीं छोड़तीं।
श्लोक के शब्दों का अर्थ
श्लोक में ‘अद्वैधमनसं’ का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसका मन दुविधा में न हो और जो पूरी तरह एकाग्र तथा दृढ़ निश्चयी हो। ‘युक्तं’ का अर्थ है संयमी, अनुशासित और अपने काम में हमेशा लगा रहने वाला व्यक्ति। ‘शूरं’ का अर्थ वीर और पराक्रमी, जबकि ‘धीरं’ का अर्थ धैर्यवान और संकट के समय विचलित न होने वाला व्यक्ति है। ‘विपश्चितम्’ का अर्थ विद्वान, बुद्धिमान और शास्त्र का ज्ञाता है।
समृद्धि का साथ
‘न श्रीः सन्त्यजते नित्यम्’ का अर्थ है कि श्री यानी लक्ष्मी या समृद्धि ऐसे व्यक्ति का साथ कभी नहीं छोड़ती। वहीं, ‘आदित्यमिव रश्मयः’ का अर्थ है कि जैसे सूर्य को उसकी किरणें कभी नहीं छोड़तीं, उसी तरह कर्मठ, वीर, धैर्यवान और विद्वान व्यक्ति से समृद्धि जुड़ी रहती है।
11 सितंबर को भी साझा किया था सुभाषितम
प्रधानमंत्री मोदी ने 11 सितंबर को भी ‘सुभाषितम’ साझा किया था। उन्होंने लिखा था, “चातुर्वर्ण्यस्य धर्माश्च रक्षितव्या महीक्षिता। धर्मसंकररक्षा च राज्ञां धर्म: सनातन:”। इसका हिंदी अर्थ बताया गया था कि जनप्रतिनिधि का कर्तव्य सेवा, समर्पण और कुशल नेतृत्व के माध्यम से समाज के सभी वर्गों में न्याय, समरसता और लोककल्याण को बढ़ावा देना तथा सामाजिक व्यवस्था में नैतिक मूल्यों और धर्म की रक्षा करना है।
10 जून को भी साझा किया था संस्कृत श्लोक
इससे पहले 10 जून को पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक, “सदानुरक्तप्रकृतिः प्रजापालनतत्परः। विनीतात्मा हि नृपतिर्भूयसी श्रियमश्नुते॥” साझा किया था। इसका हिंदी अर्थ था कि जो जनप्रतिनिधि सेवा को अपना धर्म मानकर निरंतर जनहित में कार्य करता है, सुशासन के जरिए जनता की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करता है तथा विनम्रता और संयम के साथ विकास को लक्ष्य बनाकर समाज की उन्नति के लिए समर्पित रहता है, वही जनविश्वास, यश और समृद्धि प्राप्त करता है।