भारत में फिलीपींस के राजदूत जोसेल एफ. इग्नासियो ने भारतीय वैश्विक मामलों की परिषद (ICWA) के 25वें वर्षगांठ समारोह में कहा कि पिछले एक दशक के दौरान भारत और फिलीपींस के संबंधों में उल्लेखनीय मजबूती आई है और पिछले साल दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया।
मंगलवार को भारतीय वैश्विक मामलों की परिषद (ICWA) के सिल्वर जुबली समारोह के समापन सत्र को संबोधित करते हुए इग्नासियो ने कहा, “हमारे संबंध औपचारिक रूप से और कूटनीतिक स्तर पर 77 साल पुराने हैं, वास्तव में करीब 10 साल पहले संबंधों में स्पष्ट मजबूती आनी शुरू हुई। पिछले साल मेरे राष्ट्रपति की राजकीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और मेरे राष्ट्रपति ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया।”
उन्होंने कहा कि बदलती विदेश नीति और सुरक्षा चुनौतियों के बीच फिलीपींस अब भारत को “आपसी और रणनीतिक विश्वास वाला एक महत्वपूर्ण साझेदार” मानता है।
इग्नासियो ने कहा, “इसका एक कारण कठिन विदेश नीति से जुड़े मुद्दे और सवाल भी हैं। इसलिए फिलीपींस के लिए अब भारत आपसी और रणनीतिक विश्वास वाला एक महत्वपूर्ण साझेदार है। हम हितों का स्पष्ट मेल देखते हैं, खासकर फिलीपींस के लिए समुद्री क्षेत्र में हम भारत को एक जिम्मेदार पक्ष, पसंदीदा सुरक्षा साझेदार और किसी संकट की स्थिति में सबसे पहले मदद करने वाले देश के रूप में देखते हैं।”
फिलीपींस के समुद्री यात्रियों को भारत की सहायता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “पिछले दो वर्षों की अनिश्चितताओं के बीच जब भारत ने व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र में फिलीपींस के समुद्री यात्रियों को बचाने के लिए मदद की, तब हमने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया।”
फिलीपींस के राजदूत ने भारत को आसियान देशों के लिए ज्ञान के स्रोत और एक मॉडल के रूप में भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, “आसियान और निश्चित रूप से फिलीपींस के लिए भारत एक मॉडल और ज्ञान का स्रोत भी है। हम भारत को एक मूल्यवान साझेदार के रूप में देखते हैं।”
इसी कार्यक्रम में भारत में चिली के राजदूत जुआन रोलांडो अंगुलो मोन्साल्वे ने कहा कि लैटिन अमेरिका में भारत को एक मित्रवत देश के रूप में देखा जाता है, जिसके पास काफी सॉफ्ट पावर है। उन्होंने भारत और लैटिन अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
मोन्साल्वे ने कहा, “भारत को काफी सॉफ्ट पावर वाले एक मित्रवत देश के रूप में देखा जाता है। इसे एक गैर-आक्रामक देश के रूप में माना जाता है। भारत के अपनी सीमाओं से बाहर जाने का कोई इतिहास नहीं है।
उन्होंने भारत और लैटिन अमेरिकी समाजों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक समानताओं की ओर इशारा किया, जिसमें परिवार और आध्यात्मिकता का महत्व भी शामिल है।
उन्होंने कहा, “जब मैं सॉफ्ट पावर की बात करता हूं, तो भारत के पास ऐसी कई चीजें हैं जो लैटिन अमेरिकी समाजों के लिए बहुत आकर्षक हैं और जिनमें सामाजिक स्तर पर कई समान दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए, परिवार का महत्व। भारत की आध्यात्मिकता भी दुनिया के हमारे हिस्से में अच्छी तरह देखी जाती है। भारत और भारत की प्रगति को लेकर काफी सकारात्मक दृष्टिकोण है।”
पिछले साल अपने पूर्व राष्ट्रपति की भारत यात्रा को याद करते हुए मोन्साल्वे ने कहा, “मेरे पूर्व राष्ट्रपति जब पिछले साल यहां आए थे, तो उन्होंने बहुत स्पष्ट रूप से कहा था कि दुनिया के कई हिस्सों में हमें भारत की अधिक जरूरत है। इन मूल्यों वाला देश दुनिया के हमारे हिस्से में मौजूद होना चाहिए।”
उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में भारत की ताकत को भी रेखांकित किया और कहा कि लैटिन अमेरिका में भारत की भागीदारी बढ़ रही है।
चिली के राजदूत ने कहा, “हम भारत को IT, फार्मा, अंतरिक्ष, सैटेलाइट और इस तरह की तकनीकों जैसे कुछ खास क्षेत्रों में बहुत मजबूत मानते हैं। हम यह भी देखते हैं कि भारत लैटिन अमेरिका को फिर से खोज रहा है।”
विदेश मंत्री एस. जयशंकर को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, “मैं मंत्री जयशंकर को धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि उनके मार्गदर्शन में हमने लैटिन अमेरिका के अलग-अलग देशों में भारतीय दूतावासों की शुरुआत देखी है।”
X पर एक पोस्ट में जयशंकर ने ICWA के सिल्वर जुबली समारोह के समापन संबोधन के बाद भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमताओं, बदलते संचार परिदृश्य और ग्लोबल साउथ के साथ भारत के जुड़ाव को रेखांकित किया।
जयशंकर ने कहा, “@ICWA_NewDelhi को राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किए जाने के सिल्वर जुबली समारोह का समापन संबोधन देकर प्रसन्नता हुई।”
उन्होंने देश की कूटनीति को आकार देने वाले “समकालीन रुझानों” पर जोर दिया। इनमें पिछले एक दशक में भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और क्षमताएं तथा वैश्विक जुड़ाव पर उनके प्रभाव, बदलता वैश्विक कार्यबल, सामुदायिक पहल, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताएं और गतिशीलता से जुड़े समझौते शामिल हैं।
उन्होंने “AI के दौर में संचार और नैरेटिव निर्माण की बदलती प्रकृति”, भारत के “ग्लोबल साउथ के साथ मजबूत संबंधों और एकजुटता”, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत के उस दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया जो “एक सभ्यतागत राष्ट्र के रूप में उसके व्यक्तित्व” को दर्शाता है। उन्होंने बहुध्रुवीयता, रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र विदेश नीति के रुख के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया।
जयशंकर ने कहा, “भारत एक अशांत दुनिया में आगे बढ़ने के लिए नियत है और इस प्रक्रिया के बौद्धिक आयाम निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण होंगे।” उन्होंने विश्वास जताया कि ICWA “थिंक टैंक, अकादमिक और नीति जगत के लिए एक स्वाभाविक मिलन स्थल के रूप में काम करता रहेगा और दुनिया के सामने भारत का दृष्टिकोण रखेगा।”
ICWA की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, परिषद की स्थापना 1943 में भारतीय बुद्धिजीवियों के एक समूह ने थिंक टैंक के रूप में की थी और इसे सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत एक गैर-आधिकारिक, गैर-राजनीतिक और गैर-लाभकारी संगठन के रूप में पंजीकृत किया गया था। वर्ष 2001 में संसद के एक अधिनियम के जरिए इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया गया। भारत के उपराष्ट्रपति ICWA के पदेन अध्यक्ष होते हैं।