चण्डीगढ़ : श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी में अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं शांति महायज्ञ का पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक साधना के वातावरण में संपन्न हुआ। प्रातः 6:30 बजे भगवान जिनेन्द्र देव के अभिषेक एवं मुख्य मंदिर तथा विधान मंडप में शांतिधारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके उपरांत ब्रह्मचारिणी आशा दीदी के सान्निध्य में मंगलाचरण, पूजन तथा सिद्धचक्र महामंडल विधान की निर्धारित विधियाँ अत्यंत श्रद्धा एवं भक्तिभाव से संपन्न हुईं। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने विधान में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा विश्व शांति, समाज के कल्याण एवं आत्मकल्याण की मंगलकामना की। आज कि शांतिधारा का सौभग्य नवरत्तन जैन, मनीष जैन एवं जितेंदर जैन खरड़ को प्राप्त हुआ।
आज पंचम दिवस पर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के श्रीचरणों में 128 अर्घ्य समर्पित किए गए। अपने प्रवचनों में ब्रह्मचारिणी आशा दीदी ने बताया कि अष्टान्हिका महापर्व के प्रारंभिक दिवस क्रमशः अरिहंत, सिद्ध एवं आचार्य परमेष्ठी की आराधना को समर्पित होते हैं, जबकि पंचम दिवस विशेष रूप से उपाध्याय परमेष्ठी की आराधना का दिन माना जाता है। उपाध्याय परमेष्ठी वे महान गुरु हैं जो जिनवाणी का अध्ययन एवं अध्यापन कराकर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
दीदी ने कहा कि मनुष्य के भीतर विद्यमान अज्ञान, संशय एवं भ्रम का मूल कारण ज्ञानावरणीय कर्म है। पंचम दिवस की विशेष पूजा-विधि, 128 अर्घ्यों की आराधना तथा मंत्र-जाप का उद्देश्य इसी ज्ञानावरणीय कर्म की निर्जरा करना है, ताकि आत्मा का स्वाभाविक अनंत ज्ञान प्रकट हो सके। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे साधक की आराधना आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे उसकी आत्मा पर पड़े कर्मों के आवरण हटने लगते हैं और आत्मिक प्रकाश का अनुभव होता है।
आशा दीदी ने कहा कि अष्टान्हिका महापर्व का पंचम दिवस साधना के सबसे गहन चरणों में प्रवेश का प्रतीक है। इस दिन श्रद्धालु बाह्य पूजा के साथ-साथ आत्मचिंतन, स्वाध्याय, संयम एवं जिनवाणी के अध्ययन का विशेष संकल्प लेते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे उपाध्याय परमेष्ठी के ज्ञानमय जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में अध्ययन, मनन और आत्मअनुशासन को स्थान दें।
आज का विधान प्रातः लगभग 10:00 बजे मंगलमय वातावरण में संपन्न हुआ। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भगवान जिनेन्द्र के जयघोष, मंत्रोच्चारण एवं भक्तिभाव से गुंजायमान रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सिद्धचक्र महामंडल विधान में भाग लेकर समस्त विश्व में सुख, शांति एवं मंगल की कामना की। सांय 7 बजे महाआरती कि गयी तथा भक्तो ने दीदी के प्रवचनों का लाभ लिया।
इस अवसर पर श्री दिगम्बर जैन मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्म बहादुर जैन, महासचिव संत कुमार जैन, सह सचिव शरद जैन, सह कोषाध्यक्ष नीरज जैन, नवरत्न जैन, प्रमोद जैन सहित समिति के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए आगामी दिनों के विधान में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने का आग्रह किया।